उत्तराखंड में कांग्रेस के उम्मीदवारों को लेकर अभी भी पर्दा नहीं उठ पाया है। पहले पौड़ी, फिर टिहरी और अब हरिद्वार की सीट में कौन लड़ेगा इस रहस्य से कांग्रेस सोमवार को भी पर्दा नहीं उठा सकी।
देर रात तक बैठक चलती रही
हरीश रावत के परिवार के अलावा किसी अन्य हैवीवेट उम्मीदवार की तलाश में कांग्रेस ने एक दिन और निकाल दिया। उत्तराखंड की शेष तीन सीटों को लेकर देर रात तक बैठक चलती रही।
रणनीति बनी
हरीश रावत देर शाम दिल्ली चले गए। जबकि बेटे का टिकट तय कराकर पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा देहरादून आ गए। हरक सिंह ने भी पूरा दिन देहरादून में समर्थकों के साथ बिताया और कहां पर क्या रणनीति बनानी है इस पर चर्चा की।
उत्तराखंड की गढ़वाल से संबंधित तीनों सीटों की घोषणा सोमवार को भी नहीं हो सकी। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह भी हरिद्वार सीट से चुनाव लड़ा सकती है। हालांकि इसकी पुष्टि किसी नहीं हो सकी।
अभी तक इस सीट पर मुख्यमंत्री हरीश रावत की पत्नी रेणुका रावत का नाम तय माना जा रहा था। अब इस एक मात्र सीट को लेकर मंथन जारी है।
साकेत बहुगुणा का टिकट फाइनल
विजय बहुगुणा टिहरी सीट पर बेटे साकेत बहुगुणा का टिकट फाइनल कराकर देहरादून पहुंच गए। बहुगुणा ने अपने सिपहसालारों को बुलाकर उनसे चर्चा की।
बहुगुणा कैंप से जुड़े विधायक और नेता उनके मिलने पहुंचे। विजय बहुगुणा केलगातार चुनाव लड़ने से इंकार के बाद पार्टी ने इस सीट पर साकेत को उम्मीदवार बनाया है। इस सीट पर फैसला लेने का जिम्मा पार्टी ने विजय बहुगुणा पर छोड़ा था।
पौड़ी सीट पर अपनी उम्मीदवारी तय मान चुके हरक सिंह रावत ने भी अपने समर्थकों को बुलाकर बातचीत की। उनका नाम तय होने पर उनके समर्थक देहरादून पहुंचे।
हरक सिंह के पहले पार्टी यहां से ले.जनरल गंभीर सिंह नेगी का लड़ाना चाह रही थी लेकिन उनके नाम को लेकर भारी विरोध शुरू हो गया। जिसके बाद पार्टी ने उनके स्थान पर हरक सिंह को चुनाव लड़ने केलिए तैयार किया है।