वहीं सोमवार को मृतका का पैतृक घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। प्रधान सतीश रावत ने बताया कि गांव और क्षेत्र में लंबे समय से भालू का खतरा बना है। पूरे क्षेत्र के कई गांव में भालू ग्रामीणों के घरों के नजदीक तक पहुंच रहा है। वहीं इस संबंध में करीब 15 से 20 दिन पहले डीएफओ को भी लिखित दिया गया कि गांव के आसपास भालू को पकड़ने के लिए गश्त बढ़ाई जाए लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
घटना के बाद वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे। रेंज अधिकारी बाड़ाहाट मुकेश रतूड़ी ने कहा कि अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है कि मौत भालू के हमले से बचने के कारण हुई है। वहीं भालू को रोकने के लिए लगातार गश्त जारी है और पटाखे जलाकर भगाने का प्रयास जारी है।