आरोप-4 : नगर पंचायत अध्यक्ष ने निकाय में चार कार्मिकों को आउटसोर्स के माध्यम से तैनात किया।
-नेगी ने जवाब दिया कि 2019 में चार स्वयंसेवक तैनात किए गए, लेकिन 2020 में निकाय की कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते पदमुक्त कर दिया गया। जांच में पाया गया कि नेगी ने 27 अप्रैल 2018 को जारी शासनादेश के प्रावधानों का उल्लंघन किया है।
आरोप-5 : विद्युतीकरण के नाम पर फर्जीवाड़ा किया गया। सभासदों के परित आदेशों के विपरीत अध्यक्ष व ईओ ने अवैध तरीके से लाखों की धनराशि निजी हित में उपयोग कर गोलमाल किया है।
-नेगी ने जवाब दिया कि निकाय में विद्युतीकरण की व्यवस्था अति आवश्यक थी। आपातकालीन स्थिति व अव्यवस्था को देखते हुए निकाय ने कोटेशन के माध्यम से एलईडी स्ट्रीट लाइटें खरीदीं। उनका जवाब जांच में संतोषजनक नहीं पाया गया। नगर पंचायत में बिना टेंडर के दस लाख से अधिक की एलईडी लाइट खरीदी जाने में अधिप्राप्ति नियमावली 2017 का उल्लंघन किया गया।
आरोप-6 : ईंधन का जमकर दुरुपयोग किया। अध्यक्ष ने कांग्रेस के अपने चहेतों, रिश्तेदारों की शादियों में ईंधन भरवाकर बिल नगर पंचायत के नाम फाड़ा।
नेगी ने कहा कि राजकीय कार्यों के लिए योग्य वाहन न होने पर निदेशालय को वाहन खरीद के लिए पत्र भेजा था। स्वीकृति न आने पर उन्होंने अपने वाहन को इस्तेमाल किया, जिसका कोई मरम्मत या किराए का बिल नहीं लिया गया। ईओ का निजी वाहन जनहित में इस्तेमाल किया गया।
जांच में पता चला कि अध्यक्ष ने तीन निजी और एक अपनी व्यक्तिगत वाहन में डीजल-पेट्रोल भरवाया था। इसके अलावा एक वाहन जुलाई 2020-सितंबर 2021 तक किराए पर भी लिया था, जिसके लिए नौ लाख 23 हजार का भुगतान निकाय से किया गया। कुल 11 लाख 73 हजार की हानि नगर पंचायत को हुई है। जो कि अधिप्राप्ति नियमावली का उल्लंघन है।
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नोटिस किया गया था जारी
डीएम ने पिछले साल आठ जुलाई को जांच रिपोर्ट शासन को भेजी थी, जिसके आधार पर शासन ने इस साल 16 जनवरी को नेगी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नेगी ने 7 फरवरी को जवाब भेजा, जिसके बाद 31 मार्च को शासन ने शहरी विकास निदेशक को मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए। 16 जुलाई को निदेशालय ने शासन को विस्तृत जांच रिपोर्ट उपलब्ध करा दी।