पांच किमी की होगी पहली सुरंग
पिथौरागढ़ जिले के जौलिंगकांग (व्यास घाटी) से बेदाग (दारमा घाटी) तक की यात्रा शिमला पास होते हुए पूरी की जाती है, जो लगभग पूरे वर्ष बर्फ से ढकी रहती है। इस स्थान पर सड़क मार्ग का निर्माण करना बहुत कठित है। जौलिंगकांग के मध्य पांच किमी सुरंग का निर्माण वेदांग से गो एवं सिपु तक 20 किमी सड़क मार्ग सहित किए जाने से बीआरओ एवं सीपीडब्लूडी की ओर से निर्मित तवाघाट से बेदांग तक के मार्ग को जोड़ा जाएगा। यह जौलिंगकांग एवं बेदांग की दूरी 161 किमी कम कर देगा।
22 किमी लंबी होगी दूसरी सुरंग
वर्षभर बर्फ से ढके रहने वाले पैदल मार्ग सिपू से तोला तक मोटर मार्ग का निर्माण भी कठिन है। सिपु से तोला के मध्य लगभग 22 किमी लंबाई की सुरंग का निर्माण किए जाने से दारमा वैली और जोहार वैली एक दूसरे से जुड़ जाएंगे।
30 किमी लंबी होगी तीसरी सुरंग
पिथौरागढ़ के मिलम से चमोली के लप्थल तक का पैदल मार्ग भी वर्षभर बर्फ से ढका रहता है। इस भाग में भी सड़क मार्ग का निर्माण किया जाना मुश्किल है। मिलम से लप्थल तक 30 किमी टनल का निर्माण होने से पिथौरागढ़ की जोहार घाटी एवं चमोली का लप्थल सड़क मार्ग से जुड़ जाएगा।
सीएम धामी ने पीएम मोदी के सम्मुख भी उठाया मामला
हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शिष्टाचार भेंट के दौरान यह मामला उठाया था। उन्होंने राज्य सरकार की ओर से भेजे गए इस प्रस्ताव का जिक्र करते हुए इस शीघ्र मंजूरी दिलाए जाने का अनुरोध किया था।
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प्रदेश की सीमाएं अंतरराष्ट्रीय रूप से देश की सामरिक महत्व के लिहाज महत्वपूर्ण हैं। सीमाओं में सैनिकों एवं आम जनमानस के आवागमन का मुख्य साधन सड़क मार्ग ही हैं, लेकिन इस क्षेत्र में वर्षभर बर्फबारी के चलते सड़कों का निर्माण संभव नहीं है। इसको देखते हुए सुरंग मार्गों का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया है। - पंकज पांडेय, सचिव, लोनिवि, उत्तराखंड शासन