उत्तरकाशी के खरसाली में ग्रामीणों की सुविधा के साथ ही यात्रा महत्व की महज 75 मीटर सड़क शासन-प्रशासन नहीं बनाया पाया।
ऐसे में ग्रामीणों ने अब स्वयं ही फूलचट्टी-खरसाली-जानकीचट्टी सड़क तैयार करने का निर्णय लिया। नवरात्र शुभारंभ के साथ ही ग्रामीणों ने सड़क निर्माण कार्य शुरू कर दिया और एक हफ्ते में सड़क तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया। निर्माण कार्य की निगरानी के लिए एक समिति भी बनाई गई है।
यमुनोत्री के तीर्थ पुरोहितों का गांव खरसाली अभी तक यात्रा की मुख्य धारा में शामिल नहीं हो पाया है। फूलचट्टी से खरसाली और यमुनोत्री के आखिरी पड़ाव जानकीचट्टी से खरसाली तक सड़क का निर्माण किया गया है, लेकिन इन दोनों सड़कों के बीच 75 मीटर हिस्से में फूलचट्टी-खरसाली-जानकीचट्टी तक सड़क नहीं बनने से तीर्थयात्रियों को सड़क का लाभ नहीं मिल पाता है। यमुनोत्री के तीर्थ पुरोहित पुरुषोत्तम उनियाल ने बताया कि खरसाली में प्राचीन शनि मंदिर, मां यमुना के शीतकालीन प्रवास वाले मंदिर के साथ ही हेलीपैड भी है। यात्रा सीजन में जानकीचट्टी वाली सड़क पर घंटों जाम की स्थिति रहती है। ऐसे में यदि खरसाली होते हुए जानकीचट्टी तक सड़क पर यातायात चले तो तीर्थयात्रियों को सुविधा भी मिलेगी और खरसाली गांव यात्रा की मुख्य धारा में शामिल हो जाएगा।
इसके साथ ही ग्रामीणों को स्वरोजगार के अवसर भी मिलेंगे। वर्षों से इस सड़क को तैयार करने की मांग सरकार की ओर से अनसुनी की जा रही है। इससे नाराज खरसाली के ग्रामीणों ने गांव में खुली पंचायत कर स्वयं सड़क बनाने का निर्णय लिया। नवरात्र शुभारंभ के साथ ही ग्रामीणों ने श्रमदान कर सड़क का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। एक जेसीबी की मदद से बड़े कटान के साथ ही ग्रामीण स्वयं गैंती, फावड़ा, बेलचा आदि उपकरण लेकर सड़क तैयार करने में जुट गए हैं। निर्माण की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए एक समिति बनाई गई है। साथ ही सड़क निर्माण से निजी संपत्ति को नुकसान होने पर इसकी सामूहिक भरपाई का निर्णय भी लिया गया है। समिति के अध्यक्ष रणवीर राणा, प्रधान नारायण मिस्त्री, पवन उनियाल, खिलानंद उनियाल, राजपाल राणा आदि ने कहा कि एक हफ्ते में सड़क को तैयार कर दिया जाएगा।