दो बार भंग हो चुका है बोर्ड
प्रदेश में वर्ष 2017 में श्रम मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत बोर्ड के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी देख रहे थे। तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्देशों पर शासन ने अक्तूबर 2020 में हरक सिंह रावत को अध्यक्ष पद से हटाकर शमशेर सिंह सत्याल को जिम्मेदारी दे दी थी। सत्याल को त्रिवेंद्र का करीबी माना जाता था। हालांकि, तब हरक ने उन्हें हटाने का विरोध किया था। बाद में त्रिवेंद्र सरकार ने बोर्ड का नए सिरे से गठन कर दिया। सत्याल की अध्यक्षता वाले बोर्ड ने नवंबर में पिछले बोर्ड के फैसले पलट दिए थे। इस बीच मुख्यमंत्री पद पर पुष्कर सिंह धामी के आने के बाद हरक सिंह रावत ने सत्याल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। उसके बाद सरकार ने 29 सितंबर 2021 को बोर्ड दोबारा भंग करते हुए सत्याल को हटा दिया था।
विवादों से उबरकर श्रमिक कल्याण की चुनौती
कर्मकार बोर्ड में साइकिल आवंटन घोटाला, विभिन्न योजनाओं के भुगतान में गड़बड़ी, बोर्ड के सचिव पद पर कार्यरत अधिकारियों के विवाद, ईएसआई अस्पताल जैसे तमाम विवादों से उबरकर अब बोर्ड की नई टीम के सामने श्रमिकों के कल्याण में काम करने की चुनौती होगी। सचिव श्रम आर मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि जल्द ही बोर्ड की पहली बैठक बुलाई जाएगी।