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ज्योतिषशास्त्र के अध्ययन व शोध का बड़ा केंद्र बनेगा उत्तराखंड 

Mon, 15 May 2017 08:22 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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ज्योतिष महाकुंभ के दूसरे सत्र में ज्योतिषशास्त्र के विभिन्न आयामों पर मंथन हुआ। उत्तराखंड सरकार के दो कैबेनिट मंत्रियों ने घोषणा की कि उत्तराखंड ज्योतिषशास्त्र के अध्ययन व शोध का बड़ा केंद्र बनेगा। 
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जीएमएस रोड स्थित होटल सैफ्रौन लीफ में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि उत्तराखंड में ज्योतिष विज्ञान के शोध व अध्ययन के लिए बड़ा काम किया जाएगा। देवभूमि इसके शोध व अध्ययन का बड़ा केंद्र बनेगा। 

इतिहास में पहुंचते हुए उन्होंने कहा कि अरब के खलीफा अल मंजूर ने भी भारतीय ज्योतिष, विज्ञान व अंक शास्त्र का महत्व समझा था। इसीलिए भारतीय ज्ञान का अरबी में अनुवाद करवाया। अरब से गणित, विज्ञान व ज्योतिषशास्त्र यूरोप गया। इसी कारण इतिहासकार अलफर्ड हूफर ने साफ लिखा है कि गणित, विज्ञान की तरक्की के लिए यूरोपीय जगत अरब का ऋणी है। 
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हालांकि इसके बुनियाद में भारत है। अंक पद्धति यूरोप में विज्ञान के क्षेत्र में अपूर्व प्रगति का आधार बनी। पंत बोले कि अरब जगत ने पश्चिम को नई रोशनी दी उसके पीछे असली योगदान भारत का है। लेकिन जर्मन विद्वान मैक्समूलर ने भारतीय मनीषा को विकृत ढंग से पेश किया। इससे हममें हीनता का भाव पैदा हुआ। इसलिए हमें अपनी सोई हुई चेतना व आत्मा को जगाना होगा। 

शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि ज्योतिषियों के साथ मिलकर हम उत्तराखंड को इस महान ज्ञान का बड़ा केंद्र बनाएंगे। हमारा ज्ञान आधुनिक स्वरूप लेगा। इससे देश दुनिया के लोग यहां आएंगे। यहां के ज्योतिषी विदेश जाएंगे। विदेशी मुद्रा का भी आगमन होगा। ज्योतिषियों को चाहिए कि वे प्रदेश के विकास की राह तय करें। 
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अध्यक्षता करते हुए आचार्य केए दूबे पद्मेश ने कहा कि ज्योतिषशास्त्र का महत्व वैश्विक है। इसकी भौगोलिक सीमा नहीं है। अभी क्षेत्रीय पंचांगों पर निर्भरता रहती है। अभी बहुत शोध की आवश्यकता है। 

ज्योतिषविद् एचएस रावत ने कहा चिकित्सकीय ज्योतिषशास्त्र से रोगों को दूर भगाया जा सकता है। इसके लिए बड़े ज्योतिषीय हस्तक्षेप की दरकार होती है। 
ज्योतिषविद् सतीश चंद्र शर्मा ने कहा कि ईश्वर के बाद सबसे बड़ी शक्ति गति की है। शैव व वैष्णव दोनों ही धाराओं ने सर्प को महत्व दिया है। सर्प यानि राहु। गति ही राहु है। हर ज्योतिषी को यह स्मरण रखना होगा कि इसका विज्ञान का आधार अध्यात्म है। इसके बारे ऋषि पाराशर बहुत मौलिक ज्ञान दे गए हैं। 

ग्रह-नक्षत्र व वास्तु व्यक्ति को धीरुभाई अंबानी बना सकते हैं। वास्तु दोष जारी रहे तो कमजोर नक्षत्र वालों का जीवन भी समाप्त हो सकता है।
पं. मुकेश भारद्वाज ने कहा कि पूर्व जन्म के संस्कारों के कारण ही वर्तमान जीवन होता है।

पूर्व जन्मों के पापों को वर्तमान के शुभ कर्मों से ठीक किया जा सकता है। इसलिए शुभ सोच, सत्संग, सेवा और पराक्रम कर ईश्वर का आर्शीवाद प्राप्त करा जा सकता है। अमर उजाला के यूनिट हेड राहुल चौहान ने दोनों मंत्रियों को स्मृति चिन्ह दे उनका स्वागत किया।  
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