औली में गुप्ता बंधुओं के दो बेटों के शादी समारोह का आयोजन तय होने के बाद सरकार यह दावा कर रही थी कि उत्तराखंड वेडिंग डेस्टिनेशन के तौर पर विकसित किया जाएगा। सरकार के इस फैसले के खिलाफ भाजपा के पूर्व उपाध्यक्ष रविंद्र जुगरान के अलावा उक्रांद के पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाठी ने सवाल खड़े किए थे। दोनों नेताओं का कहना था कि उच्च हिमालयी क्षेत्र और बुग्यालों में शादी समारोह से पर्यावरणीय नुकसान होगा।
यह हाईकोर्ट के फैसले की अवमानना भी है। प्रदेश सरकार ने समारोह के लिए तमाम तरह की अनुमतियां तो गुप्ता परिवार को मुहैया करवा दी। लेकिन इस बीच हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल हुई। याचिका पर हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। इससे आयोजकों की मुश्किलें बढ़ी हैं। हिमालय की मनोरम वादियों में इस तरह के निजी आयोजनों के भविष्य पर भी सवाल खड़ा हो गया है। वहीं, इस तरह के आयोजन उत्तराखंड में करने की सोच रहे अन्य बड़े व्यवसायी घराने भी प्रदेश में आने से बचेंगे।