निर्माणाधीन टनकपुर-चंपावत बारहमासी सड़क बुधवार को तीन स्थानों पर भारी मलबा आने से बंद है। अमरूबैंड के पास मलबा आने के साथ ही सड़क करीब सात फुट कट गई है। इसके अलावा अमोड़ी और चल्थी में भी भारी मलबा आने से सड़क बंद है। प्रशासन, पुलिस एवं ठेकेदार कंपनी की टीमें रास्ता खोलने के प्रयास जुटी है। खबर लिखे जाने तक टनकपुर-चंपावत राजमार्ग पर यातायात सुचारु नहीं हो पाया था।
आपदा कंट्रोल रूम के मुताबिक बुधवार सुबह करीब सवा छह बजे अमरूबैंड के अलावा अमोड़ी से एक किमी चंपावत की ओर एवं चल्थी और सिन्याड़ी के बीच पहाड़ी का मलबा आने से राजमार्ग बंद हो गया। सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस, कार्यदायी विभाग एवं ठेकेदार कंपनियों की टीमें मौके को रवाना हुई। अमरूबैंड में एसडीएम अनिल सिंह गर्ब्याल, तहसीलदार पूनम पंत ने पहुंचकर जेसीबी से मलबा हटाने का काम शुरू कराया। करीब छह घंटे बाद मलबा हटाकर दोपहर करीब सवा बारह बजे सड़क खोली जा सकी।
अमरूबैंड के पास बाधित स्थल पर सड़क करीब सात फुट खाई की तरफ कट गई है। अमरूबैंड का मलबा हटाने के बाद सिन्याड़ी से टनकपुर तक तो राजमार्ग दोपहर बाद खुल गया, लेकिन अमोड़ी और चल्थी से आगे सड़क बंद है। आपदा कंट्रोल रूम के मुताबिक जेसीबी और पोकलैंड मशीन से मलबा हटाने का काम चल रहा है। बहरहाल, खबर लिखे जाने तक सड़क नहीं खुल पाई थी। एसडीएम गर्ब्याल ने बताया कि सड़क की स्थिति खतरनाक है। कई स्थानों पर कभी भी मलबा आने का खतरा बना है। उन्होंने बताया कि कार्यदायी विभाग एवं ठेकेदार कंपनी को सड़क की दशा शीघ्र सुधारने एवं सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रखने के निर्देश दिए गए हैं।
टनकपुर-चंपावत राजमार्ग के बंद होने से बुधवार को मार्ग पर फंसे यात्रियों को खासी परेशानी हुई। अमरूबैंड में सुबह सवा छह बजे से दोपहर सवा बारह बजे तक भूखे-प्यासे रहकर यात्रियों को छह घंटे सड़क खुलने की प्रतीक्षा करनी पड़ी। चंपावत की ओर से आ रहे यात्री तो टनकपुर पहुंच कर गंतव्य को रवाना हो गए, लेकिन पर्वतीय क्षेत्र को जाने वाले यात्री खबर लिखे जाने चल्थी और अमोड़ी ही फंसे थे। अमरूबैंड, अमोड़ी एवं चल्थी में सड़क बंद होने की सूचना के बाद पुलिस ने भारी वाहनों को ककरालीगेट बैरियर पर ही रोक दिया। सुबह करीब साढ़े छह बजे सूचना मिलते ही ककरालीगेट बैरियर पर पुलिस तैनात कर दी गई थी।
मौसम के तेवरों से सहमे पांचवें दल के यात्री
खराब मौसम के चलते पिछले तीन दिनों से गुंजी में फंसे पांचवें दल के कैलाश यात्री भयभीत हैं। रात में तेज बारिश होने पर यात्री सहम जा रहे हैं। वहीं, छठा दल भी परिक्रमा पूरी कर गुंजी पहुंच गया है। सातवें दल के यात्री नाभीढांग पहुंच गए हैं। आठवां दल पिछले तीन दिनों से पिथौरागढ़ में रुका है। कैलाश मानसरोवर यात्रा का पांचवां दल वापसी में तीन दिनों से गुंजी में फंसा है। इस दल के यात्रियों को पिथौरागढ़ से गुंजी जाते समय भी परेशानी का सामना करना पड़ा था। छियालेख में कोहरे के चलते हेलीकॉप्टरों के उड़ान नहीं भरने से पांच दिनों तक यात्रियों को पिथौरागढ़ में रुकना पड़ा था। अब वापसी में गुंजी में फंसने से यात्री भयभीत हैं।
आईटीबीपी सातवीं वाहिनी मिर्थी कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के अनुसार उच्च हिमालयी क्षेत्र में लगातार बारिश हो रही है। यात्री भूस्खलन होने की आशंका से डरे हैं। उनमें सुविधाओं को लेकर भी आक्रोश है। उनका कहना है कि उन्हें बूंदी से धारचूला तक छोटे हेलीकॉप्टरों के जरिये पहुंचाया जाना चाहिए। छठा दल भी परिक्रमा पूरी कर गुंजी पहुंच गया है। सातवां दल बुधवार को नाभीढांग पहुंच गया है। यात्री बृहस्पतिवार तड़के नाभीढांग से रवाना होकर लिपुलेख से चीन में प्रवेश करेंगे। आठवां दल अभी पिथौरागढ़ में रुका है। बुधवार को पिथौरागढ़ से वायुसेना का एक हेलीकॉप्टर यात्रियों को लेने गुंजी रवाना हुआ, लेकिन छियालेख में कोहरे के चलते लौट आया। मौसम ठीक रहा तो यात्रियों को बृहस्पतिवार को गुंजी पहुंचाया जाएगा।