13 दिसंबर को उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर व पिथौरागढ़ के ज्यादातर 2500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले स्थानों पर तेज बारिश व बर्फबारी और देहरादून, टिहरी, नैनीताल व अल्मोड़ा में कुछ इलाकों में बर्फ गिर सकती है।
इसके अलावा 12 व 13 को कई इलाकों में ओले गिरने का भी अनुमान है। मौसम केंद्र ने एडवाइजरी जारी करते हुए कोल्ड डे के दौरान लोगों को एहतियात बरतने का सुझाव दिया है।
क्या है कोल्ड डे कंडीशन
किसी भी क्षेत्र के सामान्य अधिकतम तापमान में छह डिग्री तक की कमी आने की स्थिति को कोल्ड डे कंडीशन कहा जाता है। इस अवधि में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से कम होना चाहिए। राज्य के ज्यादातर क्षेत्रों में इन दिनों न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से कम ही बना हुआ है।
मौसम विभाग की ओर से उत्तराखंड के उच्च पर्वतीय जनपदों अल्मोड़ा, बागेश्वर, चंपावत, देहरादून, उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी गढ़वाल, टिहरी गढ़वाल, नैनीताल तथा पिथौरागढ़ में भारी बर्फबारी के साथ ही बारिश होेने की संभावनाओं व मैदानी इलाकों में जबरदस्त शीतलहर की आशंका को लेकर जिला प्रशासन सतर्क हो गया है।
अपर जिलाधिकारी एवं प्रभारी अधिकारी जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण बीर सिंह बुदियाल ने अधिकारियों के साथ ही बैठक करने के साथ ही तमाम संबंधित विभागों को एडवाइजरी जारी की है। अपर जिलाधिकारी बीर सिंह बुदियाल ने सभी संबंधित विभागाध्यक्षों एवं संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि शीतलहर के मद्देनजर खाद्य गोदामों में राशन की पर्याप्त व्यवस्था कर ली जाए।
उन्होंने कहा है कि साथ ही शीतलहर के प्रकोप से लोगों को बचाने के लिए सार्वजनिक स्थानों मसलन धर्मशालाओं, रैनबसेरों, मुसाफिर खाना, पड़ावों, सराय, चौराहा, रेल एवं बस स्टेशनों पर आवश्यकतानुसार अलाव जलाने की व्यवस्था कर ली जाए। शीतलहर के दौरान निराश्रित एवं असहाय लोगों को ठंड से बचाया जा सके।
इसके लिए नि:शुल्क कंबलों के वितरण की व्यवस्था की जाए। बर्फबारी या बारिश के दौरान बिजली एवं पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में इनकी तत्काल मरम्मत कराई जाए। भूस्खलन की स्थिति में अत्यधिक सतर्कता बरतने के साथ ही क्षतिग्रस्त मार्गों की मरम्मत तत्काल कराई जाए ताकि यातायात न अवरुद्ध हो। उपजिलाधिकारियों को हिदायत दी गई है कि लेखपालों के जरिये हरेक क्षेत्र पर निगरानी रखें।
देहरादून में कोल्ड डे सिर पर है। मौसम विभाग कई दिन से बारिश, बर्फबारी और ओलावृष्टि की संभावनाएं जता रहा है। बावजूद इसके शहर में अलाव की व्यवस्था कागजों से बाहर नहीं आ पाई है। हालांकि मेयर का कहना है कि 15 दिसंबर से अलाव जलाने के निर्देश दिए गए हैं।
शहर के कई ऐसे इलाके हैं, जहां हर साल सर्दियों में अलाव जलाए जाते हैं। यह केवल अलाव नहीं बल्कि गरीबों की रात काटने का एक बेहतर इंतजाम माना जाता है। इस साल रात का तापमान 7.2 डिग्री तक गिर रहा है लेकिन नगर निगम की अलाव योजना अभी तक उठकर ऊपर नहीं आ पाई है। मंगलवार की रात्रि अमर उजाला ने शहर में अलग-अलग जगहों पर अलाव का रियलिटी चेक किया तो खुलकर लापरवाही सामने आई।
नगर निगम के दून अस्पताल की ओर स्थित गेट के नीचे लोग सर्दी में ठिठुरते हुए पाए गए। मंडी के भीतर तो कर्मचारियों ने अलाव जलाया हुआ था लेकिन आसपास के क्षेत्रों में कहीं भी अलाव नजर नहीं आया। मेयर सुनील उनियाल गामा का कहना है कि उन्होंने मंगलवार को दिन में ही घंटाघर और सहारनपुर चौक पर अलाव जलाने के निर्देश दिए थे। अमर उजाला टीम ने यहां की पड़ताल की तो यहां भी अलाव नजर नहीं आए। आसपास लोग ठिठुरते हुए दिखे। आपको बता दें कि मौसम विभाग ने 11 से 13 दिसंबर तक बारिश और ओलावृष्टि की संभावना जताई है। जिससे ठंड में और इजाफा हो सकता है।
रैन बसेरों में राहत
हालांकि अमर उजाला की रियलिटी चेक में रैन बसेरों में कुछ राहत नजर आईं। पटेलनगर स्थित रैन बसेरे में तो पीएसी ठहरी हुई है लेकिन घंटाघर के रैन बसेरे में सुविधाएं नजर आईं।
हमने 15 दिसंबर से शहर भर में अलाव जलाने के निर्देश दिए हैं। इसकी तैयारी की जा रही है। आज से ही दो जगह अलाव की व्यवस्था करने को कहा गया था। अगर नहीं हुई तो इसे देखा जाएगा।
-सुनील उनियाल गामा, मेयर, नगर निगम