बदरीनाथ हाईवे पर भारी बारिश के कारण जगह-जगह अवरुद्ध रहा। मंगलवार रात को हुई जोरदार बारिश से बाजपुर में हाईवे पर मलबा आने से आपदा प्रभावित घाट क्षेत्र से आ रहे मुख्य विकास अधिकारी हंसादत्त पांडे, अपर जिलाधिकारी मोहन सिंह बर्निया और जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी भी फंसे रहे।
वहीं, बुधवार को दिनभर हाईवे बंद और सुचारु होता रहा। जिससे तीर्थयात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बाजपुर में मलबा आने से रात आठ बजे हाईवे अवरुद्ध हो गया था। जिससे यहां अन्य वाहनों के साथ ही जिले के आला अधिकारियों के वाहन भी फंस गए। सूचना मिलते ही बारिश में ही दो जेसीबी मशीनों से मलबे को हटाया गया। जिसके बाद रात नौ बजे हाईवे को सुचारु किया जा सका।
वहीं, लामबगड़ में रात दो बजे से अवरुद्ध हाईवे को दोपहर बारह बजे वाहनों की आवाजाही के लिए खोला गया। लेकिन फिर बारिश होने से लामबगड़ में वाहनों की आवाजाही रुक गई। एननएच की जेसीबी मशीनों से मलबा हटाने के बाद अपराह्न तीन बजे यात्रा वाहनों की आवाजाही सुचारु की गई। लेकिन क्षेत्र में लगातार बारिश होने से देर शाम को फिर हाईवे के अवरुद्ध होने की आशंका है। मेकाफेरी कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर शुभांकर पॉल का कहना है कि लगातार बारिश से हाईवे को सुचारु रखना मुश्किल बना हुआ है।
कर्णप्रयाग में गैरसैंण तहसील के उजेटिया गांव का एक व्यक्ति मंगलवार रात को रामगंगा नदी में बह गया। बुधवार सुबह पुलिस ने नदी में बहे व्यक्ति का शव बरामद कर लिया है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार उजेटिया गांव का शिशुपाल सिंह (45) रात्रि पूजा में रामगंगा नदी के किनारे मल्योडांग नामक स्थान पर गया था।
रात को 10 बजे पूजा खाने के बाद वह नदी किनारे हाथ धो रहा था। इसी दौरान उसका पैर फिसल गया और वह रामंगगा नदी में बह गया। स्थानीय लोगों की सूचना पर गैरसैंण के थानाध्यक्ष रविंद्र नेगी ने पुलिस फोर्स और ग्रामीणों के साथ रात में शिशुलाल सिंह की खोजबीन की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका। थानाध्यक्ष ने बताया कि बुधवार सुबह करीब 6.30 बजे घटनास्थल से 100 मीटर दूरी पर शिशुपाल सिंह का शव बरामद कर लिया गया है।
गलनाऊं में हाईवे पर आया मलबा, लोगों को हुई दिक्कत
कर्णप्रयाग में ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे पर गलनाऊं के पास मलबा आने से ढाई घंटे तक वाहनों की आवाजाही बंद रही। इस दौरान हाईवे के दोनों तरफ कई वाहन फंसे रहे। बाद में जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाकर वाहनों की आवाजाही शुरू हुई।
मंगलवार रात को कर्णप्रयाग, गौचर, देवाल, गैरसैंण, आदिबदरी, थराली, नारायणबगड़, लंगासू सहित ग्रामीण क्षेत्रों में तेज बारिश हुई। बारिश से कर्णप्रयाग के पास गलनाऊं में सिरण गांव को जाने वाली सड़क से सुबह लगभग छह बजे हाईवे पर भारी मात्रा में मलबा आ गया। इससे हाईवे पर कई वाहन फंस गये और दोनों तरफ वाहनों की कतार लग गई। बदरीनाथ, हेमकुंड सहित ऋषिकेश और हरिद्वार जाने जाने वाले कई वाहन करीब ढाई घंटे तक गलनाऊं में फंसे रहे। बाद में स्थानीय लोगों की सूचना पर ऑलवेदर कार्यदायी संस्था ने जेसीबी मशीनों की मदद से हाईवे पर आये मलबे को हटाया गया। आज सुबह 8.30 बजे मलबा हटने के बाद वाहनों की आवाजाही शुरू हो सकी।
रुद्रप्रयाग के बांसवाड़ा में छठवें दिन भी रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग बंद रहा। यहां पर पहाड़ी से रुक-रुककर हो रहे भूस्खलन के चलते मलबा सफाई के कार्य में भी दिक्कत हो रही हैं। दूसरी तरफ गंगानगर-बसुकेदार-गुप्तकाशी मोटर मार्ग की स्थिति भी कीचड़ के चलते कई जगहों पर दयनीय बनी हुई है। जनपद में 13 संपर्क मोटर मार्ग भी बंद पड़े हुए हैं, जिससे गांवों से लोगों को आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बीते पांच दिनों की अपेक्षा बुधवार को बांसवाड़ा में पहाड़ी से भूस्खलन की रफ्तार कम रही। इस दौरान एनएच व कार्यदायी संस्था द्वारा मलबा सफाई का कार्य शुरू किया गया, लेकिन रुक-रुककर गिर रहे पत्थर व मलबे के कारण दिनभर में कई बार मशीनें हटानी पड़ी। सड़क पर मलबे के भारी ढेर और कीचड़ के कारण मलबा व पत्थर हटाने में मजदूरों व मशीन ऑपरेटर को परेशानी हो रही है। यहां पर हल्की सी चूक जान पर भारी पड़ सकती है। हाईवे जामू नर्सरी और मुनकटिया में भी पहाड़ी से मलबा आने के कारण करीब चार घंटे बंद रहा।
एनएच के अधिकारियों का कहना है, कि बरसात से हाईवे पर डेंजर जोनों के सक्रिय होने से भूस्खलन व भूधंसाव का खतरा बढ़ गया है। बावजूद हाईवे कम से कम समय के लिए बाधित हो, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। दूसरी तरफ बरसात के कारण जनपद में लोक निर्माण व पीएमजीएसवाई समेत अन्य कार्यदायी संस्थाओं के 13 संपर्क मोटर मार्ग बंद पड़े हैं। इन मार्गों के बंद होने से धनपुर, रानीगढ़, केदारघाटी और जखोली के कई गांवों का ब्लॉक व जिला मुख्यालय से संपर्क कटने के साथ जरूरी सामान की आपूर्ति भी नहीं हो रही है। लोनिवि के ईई इंद्रजीत बोस ने बताया कि मौसम ठीक रहा तो दो दिन में मार्गों पर यातायात बहाल कर दिया जाएगा।