मंगलवार को रातभर हुई भारी बारिश और भूस्खलन से चमोली जिले में जन जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। गोपेश्वर के समीप सिरोखोमा गांव में पहाड़ी से गिरे मलबे में कमला देवी की गोशाला दब गई, जिसमें पांच मवेशी जिंदा दफन हो गए। वहीं, बदरीनाथ हाईवे जगह-जगह बाधित हो गया, जिससे आम लोगों के साथ ही सेना के वाहनों की आवाजाही ठप पड़ गई है।
जोशीमठ में गणाई और दाड़मी गांव के बीच पैदल आवाजाही का मुख्य पुल गदेरे में बह गया और मदन सिंह, मुरली सिंह व मातबर सिंह का संयुक्त घराट बह गया। पीपलकोटी के बजनीगांव में दो मकान क्षतिग्रस्त हो गए। मठ गांव के शीर्ष भाग से भूस्खलन होने से ग्रामीणों में दहशत बनी है। ग्राम प्रधान राजेंद्र हटवाल ने बताया कि भूस्खलन से कई हेक्टेयर कृषि भूमि भी नष्ट हो गई है। नगर पंचायत अध्यक्ष रमेश बंडवाल, नगर महामंत्री दीपक पंत ने प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया।
चमोली में खतरे के निशान के करीब पहुंची नदियां
मूसलाधार बारिश के कारण चमोली जिले में नदियां भी उफान पर हैं। अलकनंदा खतरे के निशान से एक मीटर नीचे बह रही है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी ने बताया कि अलकनंदा नदी का जल स्तर बुधवार को 953.70 मीटर रिकार्ड किया गया, जबकि खतरे का निशान 954.50 मीटर है। नंदाकिनी नदी का जल स्तर 867.75 मीटर रिकार्ड किया गया। खतरे का निशान 868.45 मीटर है। पिंडर नदी का जल स्तर 768.56 मीटर रिकार्ड किया गया जो खतरे के निशान 768.92 मीटर से थोड़ा ही है।
घाट में हुई सर्वाधिक बारिश
गोपेश्वर। चमोली जिले में घाट ब्लाक में सर्वाधिक बारिश रिकार्ड की गई, यहां 26 मिमी वर्षा हुई। जिले में 24 ग्रामीण सड़कें बंद हैं। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी एन के जोशी ने बताया सड़कें खोले जाने का काम जारी है।