शनिवार को रुद्रप्रयाग जनपद में जोरदार बारिश हुई। केदारनाथ, मदमहेश्वर, तुंगनाथ, चन्द्रशिला सहित अनेक ऊंचे स्थानों पर जोरदार बर्फबारी हुई। जबकि रुद्रप्रयाग, तिलवाड़ा, जखोली, मयाली, अगस्त्यमुनि, चन्द्रापुरी, भीरी, ऊखीमठ, गुप्तकाशी, गौरीकुंड, सोनप्रयाग, खांकरा, घोलतीर, नगरासू, चोपड़ा सहित सभी स्थानों पर तड़के सुबह से जोरदार बारिश हुई।
थराली के रतगांव चक, गूंठ, पारथा, कुराड़, हरिनगर लेटाल, कोलपुड़ी, गुमड़, भूमियाल पानी, गेरूड़, रूईसाण सहित बीस से अधिक गांवों में बर्फबारी हुई और एक फीट तक ताजी बर्फ जमी। बधाणगढ़ी में दो फीट बर्फ जमी। देवाल वाण, घेस, कुलिंग, वांक, मुंदोली, लोहाजंग, आयजनटाप, सौरीगाड़, पिनाऊं, हिमनी, रामपुर, तोरती आदि कई गांव बर्फ से ढके हुए हैं। रूपकुंड, वेदनी, आली, बगजी, ब्रह्मताल, भीकलताल, बगुवावास में दो दिन से लगातार बर्फबारी जारी है। बर्फबारी से रणकधार से गैरोली पैदल मार्ग बंद है।
गंगोत्री हाईवे पर तीसरे दिन भी आवाजाही ठप
उत्तरकाशी जनपद में बारिश बर्फबारी का दौर लगातार चौथे दिन भी जारी रहा, जगह-जगह भूस्खलन व सड़कों पर जमी बर्फ से यातायात अवरुद्ध हो गया है। बुधवार से लगातार हो रही बारिश बर्फबारी ने जिले की यातायात व्यवस्था प्रभावित कर दी है।
शनिवार को सुक्की टॉप से आगे जमी बर्फ व गंगनानी के निकट हुए भूस्खलन के कारण हाईवे पर तीसरे दिन भी वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही। हालांकि बीआरओ कर्मचारियों ने दोपहर तक मलबा हटाकर यातायात बहाल किया, लेकिन रुक-रुककर हो रही बारिश बर्फबारी के चलते लोगों को अभी भी आवाजाही में दिक्कत हो रही है।
उधर, शनिवार तड़के छटांगा के पास दोबारा भूस्खलन होने से यमुनोत्री हाईवे भी घंटों बाधित रहा। जगह-जगह हुए भूस्खलन के चलते आराकोट-चींवा, टिकोची-दुचाणु, चींवा-मोंडा तथा गमरी-मैजणी मोटर मार्गों पर भी आवाजाही ठप रही। जिला प्रशासन की अनदेखी तथा निर्माण एजेंसियों की लापरवाही के कारण गंगोत्री व यमुनोत्री हाईवे मातली, बड़ेथी चुंगी आदि स्थानों पर दलदल बनी है।
आकाशीय बिजली गिरने से शुक्रवार को देहरादून के आरकेडिया गोरखपुर क्षेत्र में दो मंजिला मकान की छत के बीचोंबीच बड़ा छेद हो गया। इससे नीचे खाना बना रही महिला घायल हो गई। वहीं, मोहल्ले में बड़ी संख्या में लोगों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण फुंक गए।
चारों धामों में फिर बर्फबारी, कई सड़कें बाधित, बिजली गिरने से एक की मौत
उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल में तीसरे दिन शुक्रवार को भी मौसम का मिजाज बिगड़ा रहा। चारों धामों समेत ऊंचाई वाले इलाकों में जमकर बर्फबारी हुई है। उत्तरकाशी जिले में यमुनोत्री और गंगोत्री हाईवे समेत कई सड़कें अवरुद्ध हो गईं। ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे देवप्रयाग में साढ़े पांच घंटे बाधित रहा।
गंगोत्री हाईवे पर सुक्की से आगे वाहनों की आवाजाही ठप है, जबकि यमुनोत्री हाईवे पर भी हनुमानचट्टी से आगे यातायात जोखिम भरा बना हुआ है। जगह-जगह मलबा आने से जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर में छह संपर्क मार्ग बाधित हो गए हैं। उधर, कुमाऊं मंडल में भी शुक्रवार को मूसलाधार बारिश हुई और ओले गिरे। चोटियों पर हिमपात हुआ। काशीपुर में बिजली गिरने से मलबे में दबकर बालक की मौत हो गई।
लगातार हो रही बारिश और ओलावृष्टि ने पिछले 27 घंटों में कुमाऊं में जमकर तबाही मचाई है। वहीं अंधड़ से कई घरों, मंदिरों को नुकसान पहुंचा है। शनिवार को भी मौसम खराब होने से नैनीसैनी से देहरादून और हिंडन के लिए चार उड़ानें रद्द रहीं।
पिथौरागढ़ जिले में पांखू के दंतोला गांव में एक मकान की छत अंधड़ से उड़ गई। शुक्रवार देर रात विकासखंड सल्ट के भौनडांडा में स्थित मां भौनादेवी मंदिर में बिजली गिरने से मंदिर का गुंबद ध्वस्त हो गया है। नैनीताल स्थित कुमाऊं मंडल विकास निगम के अप्पूघर के बंपिंग कार स्टैंड की छत टूट गई, जबकि बिलियर्ड्स रूम की छत के टिन उखड़ गए जिससे कमरों में पानी घुस गया। ओखलकांडा ब्लॉक की ग्रामसभा मटेला में शुक्रवार की रात बिजली गिरने से एक घर की छत क्षतिग्रस्त हो गई।
मुनस्यारी के रातापानी से लेकर नई बस्ती तक हिमपात हुआ। पिथौरागढ़ सहित जिले के विभिन्न हिस्सों में मूसलाधार बारिश हुई। शनिवार सुबह थल से मुनस्यारी के लिए निकले वाहन कालामुनि से बलाती के पास बर्फबारी से बंद हुई सड़क पर फंस गए। अल्मोड़ा के जागेश्वर और बिनसर में भी बर्फबारी हुई है। ढिकुली, क्यारी, टेढ़ा व रामनगर में बारिश और आलोवृष्टि हुई।
बारिश से टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्वांला के पास मलबा आने से करीब एक घंटे तक यातायात बंद रहा। भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर थुवा, पाडली, झूला पुल रातीघाट, भौर्यामोड़, लोहाली, नावली, काकड़ीघाट और सुयालखेत में पहाड़ियों से रुक रुक कर पत्थर शनिवार की सुबह तक गिरते रहे।
ओलावृष्टि से किसानों की फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। सर्वे के अनुसार धौलछीना क्षेत्र में 126 हेक्टेयर भूमि पर फसल पूरी तरह से तबाह हो चुकी है।
जलवायु परिवर्तन से वैज्ञानिक चिंतित
वैज्ञानिक डॉ. संदीपन मुखर्जी ने बताया कि कैस्पियन सागर (ईरान के ऊपर से) और भूमध्यसागर वाले क्षेत्र में निम्न दबाव की हवाएं पूर्व की ओर उठ रहीं हैं। इससे उत्तर-पश्चिमी हिमालय में बारिश हो रही है। कहा कि लगातार हो रहे जलवायु परिवर्तन से इस सदी के अंत तक दो डिग्री सेल्सियस तापमान बढ़ने की संभावना है।
इससे हिमालयी राज्यों में बारिश के दिन कम होने की संभावना है। जलवायु अस्थिर होगी और कहीं अधिक तो कहीं अल्प वर्षा होगी। साथ ही उच्च हिमालयी क्षेत्र और ग्लेशियरों में भी बर्फबारी कम होगा। इन सबका असर निश्चित रूप से मानव जीवन पर भी पड़ेगा।