राजधानी देहरादून में सोमवार देर रात से रुक-रुक कर बारिश जारी है। राज्य में अधिकतर इलाकों में बादल छाए हुए हैं। वहीं बदरीनाथ हाईवे नंदप्रयाग में अवरुद्ध चल रहा है। हाईवे खोलने के प्रयास जारी हैं।
पिथौरागढ़ आपदा: 'श्मशान' में बदली इंसानों की बस्ती, मकान मलबे और गांव 'कब्रिस्तान' में हुआ तब्दील
सीमांत जिले के विभिन्न हिस्सों मे लगातार हो रही भारी बारिश के कारण लोग परेशान हैं। भारी बारिश के कारण नदियों का जल स्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे नदी किनारे रह रहे लोग सहमे हुए हैं। भारी बारिश के कारण कुमाऊं में 34 सड़कें मलबे से बंद हैं। इनमें पिथौरागढ़ जिले में 19, चंपावत में 7 और बागेश्वर में आठ सड़कें बंद हैं। चार दिन से बंद थल मुनस्यारी मार्ग को मंगलवार शाम छह बजे के बाद खोला जा सका। वहीं, टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) कठौल (चल्थी) के पास भारी मलबा आने से मंगलवार को घंटों बंद रहा। हाईवे 11 बजे बाद सुचारु हो पाया। पिथौरागढ़ जिले में काली, गोरी और सरयू समेत कई नदी नाले उफान पर हैं।
इधर, नैनीताल में मंगलवार दिनभर मौसम बदलता रहा। सुबह हल्की बारिश हुई। इसके बाद मौसम सामान्य हो गया। अपराह्न एक बजे बाद फिर हल्की बारिश शुरू हो गई। कुछ देर के बाद बारिश थम गई और कोहरा छा गया। इसके बाद शाम चार बजे से तेज बारिश शुरू हो गई। नगर में पिछले 24 घंटों के दौरान 10 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है। वहीं, नैनी झील का जलस्तर मंगलवार को नौ फीट साढ़े सात इंच रिकॉर्ड हुआ। भीमताल में ग्राम पंचायत डहरा में मंगलवार की सुबह आम का पेड़ मुख्य सड़क पर गिर गया। पेड़ के गिरने से सड़क किनारे खड़ा डंपर, बिजली का पोल और लाइन क्षतिग्रस्त हो गई।
पिथौरागढ़ जिले में ये सड़कें हैं बंद
पिथौरागढ़- तवाघाट, तवाघाट-सोबला, तवाघाट-घटियाबगड़, कालिका-खुमती, बेरीखेत-गैला, दराती- मटियानी, मदकोट-बौना, गिनी बैंड-समकोट, नाचनी-भैसकोट, सोसा-सिर्खा, छिरकिला-जम्कू, मदकोट-दारमा, मदकोट-मुनस्यारी-जौलजीबी, मदकोट- फाफा, बांसबगड़- माणीधामी , बंगापानी- जाराजीबली, गलाती- रमतोली, मुनस्यारी-मिलम और संगौड़-दशौली दानू सड़क।
चंपावत जिले की बंद सड़कें
धौन-दियूरी, ललुवापानी-बनलेख, अमोड़ी-छतकोट, एसएच-खटोली मल्ली, मंच-नीड़, ढटीगांव-सिमलटुकरा और कामाज्यूला-भनार।