मौसम पर क्या पड़ेगा असर
प्रो. सती बताते हैं कि इस बर्फबारी का आने वाले दिनों के मौसम पर मिश्रित प्रभाव पड़ सकता है। एक ओर जहां मैदानी इलाकों में तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है वहीं दूसरी ओर आने वाले समय में गर्मी देर से शुरू होने की संभावना है। इसके अलावा बर्फ के पिघलने से नदियों में जलस्तर बढ़ सकता है जो जल संसाधनों के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि, कृषि क्षेत्र के लिए यह स्थिति चिंता का विषय भी बन सकती है। बेमौसम ठंड और नमी से फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई है। उन्होंने किसानों को सतर्क रहने और आवश्यक उपाय अपनाने की सलाह दी।
मार्च में कब-कब हुई बर्फबारी
बीते 26 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे पहले साल 2012 में मार्च में 1.3 इंच बर्फबारी हुई थी। इसके बाद साल 2014 में 1.5 इंच और उसके बाद सीधे साल 2020 में 0.7 इंच बर्फबारी रिकॉर्ड की गई थी। करीब छह साल के अंतराल के बाद साल 2026 में इस बार बर्फबारी हुई है। हालांकि, बीते तीन वर्षों का यह आंकड़ा मुक्तेश्वर का है। यानी इन तीन वर्षों में 2000 से 2300 मीटर तक की ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हुई थी। इस बार यह ऊंचाई 3000 मीटर से अधिक है।