हरिद्वार में मौसम के अचानक करवट बदलने से बुधवार को शहर से लेकर देहात तक हाड़ कंपाने वाली ठंड पड़ी। वहीं बुधवार शाम को नारायणबगड़ बाजार के ठीक सामने चीड़ के जंगलों में आग लगने से सैकड़ों पौधे जल गए।
ऋषिकेश में गुरुवार को दिन की शुरुआत कोहरे के साथ हुई। जिससे कड़ाके की ठंड पड़ रही है। जौलीग्रांट एयरपोर्ट के साथ ही डोईवाला क्षेत्र भी कोहरे के आगोश में रहा। हरिद्वार में भी गुरुवार को ठंड से कोई खास राहत नहीं मिली।देहरादून में मौसम साफ रहा।
हरिद्वार में बुधवार को कोहरा छाने और शीतलहर चलने से लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया। अधिकतम और न्यूनतम पारा अचानक नीचे आ गया। न्यूनतम पारा एक डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के मुताबिक बुधवार सीजन का सबसे ठंडा दिन रहा। जबकि 27 जनवरी को पारे की गिरावट का बीते दो दशकों का रिकार्ड भी बना।
मंगलवार की रात से ही कोहरा छाने लगा था। बुधवार सुबह कोहरा और घना हो गया। गंगा किनारे और देहात में तो थोड़ी ही दूरी पर कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। इससे हाईवे पर वाहन चालकों को मुश्किल का सामना करना पड़ा। सुबह के समय हाईवे और शहर की अंदर की सड़कों पर बहुत कम लोग आवाजाही कर रहे थे।
दोपहर तक कोहरा छाया रहा। दिनभर धूप नहीं निकलने से हाथ और पांवों में गलन महसूस हुई। शाम के समय फिर कोहरा छाने और हवाएं चलने से लोग घरों में कैद हो गए। सुबह-शाम को ठंड से बचने के लिए लोग अलाव जलाते नजर आए।
मौसम विभाग की रितु आलोकशाला के रिसर्च सुपरवाइजर नरेंद्र रावत के मुताबिक बुधवार को अधिकतम तापमान 12 डिग्री और न्यूनतम एक डिग्री सेल्सियस रिकार्ड हुआ। अधिकतम पारा गिरने से ठंड अधिक रही। नरेंद्र रावत ने दावा किया कि 27 जनवरी को बीते बीस सालों में सबसे कम तापमान रहा है।
नारायणबगड़ में जंगल में लगी आग
बुधवार शाम को नारायणबगड़ बाजार के ठीक सामने चीड़ के जंगलों में आग लगने से सैकड़ों पौधे जल गए। रात का समय होने के कारण आग बुझाने की कोई कार्रवाई शुरू नहीं हो पाई है। धर्म सिंह, नारायणदत्त, प्रेम सिंह, सूरज सिंह, संजय कंडारी, जयबीर सिंह ने कहा कि जंगल में आग लगातार बढ़ रही है।
क्षेत्र में असामाजिक तत्वों की ओर से जंगलों में लगातार आग की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। ठंड के मौसम में पिछले महीनों से अब तक सैकड़ों हेक्टेयर जंगल आग में जल चुके हैं। वहीं थराली क्षेत्र में भी दिसंबर और जनवरी महीने में करीब 90 प्रतिशत चीड़ के जंगल जल चुके हैं।