दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक एवं वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. केसी पंत के अनुसार मौसम के अचानक बदलने से तापमान में जिस तरीके से तेजी से उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इससे सर्दी, जुकाम, बुखार, खांसी, जैसी सामान्य बीमारियों के साथ ही दमा समेत अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की मुसीबतें बढ़ सकती हैं।
थोड़ी सी भी बारिश में यदि कोई भीग गया तो उसका बिस्तर पकड़ना तय है। कहा कि बदलते मौसम में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता थोड़ी कम हो जाती है और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में यदि बीमारियों से बचना है तो पर्याप्त कपड़े पहनने के बाद ही घर से बाहर निकले।
मुनस्यारी के ऊंचाई वाले इलाकों में रविवार रात जमकर हिमपात हुआ। पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय सहित जिले के विभिन्न हिस्सों में तेज गरज और चमक के साथ बारिश हुई। उच्च हिमालयी क्षेत्रों के साथ निचले इलाकों में हुई बर्फबारी से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मल्ला जोहार के लास्पा और मिलम में दो फुट से अधिक बर्फबारी हुई है। खलिया और भुजानी में कई पर्यटक भी बर्फबारी का आनंद उठा रहे हैं।
उच्च हिमालयी क्षेत्र मिलम, लास्पा, दारमा, व्यास और चौदास वैली में दो फुट तक हिमपात हुआ है। लास्पा में दो फुट बर्फबारी होने से बीआरओ को मुनस्यारी-मिलम सड़क बनाने में दिक्कत हो रही है। मुनस्यारी के खलिया भुजानी में भी दो फुट बर्फबारी हुई है, जिसका कई पर्यटक जमकर आनंद उठा रहे हैं। धारचूला के व्यास और दारमा घाटी में भी हिमपात हुआ। निचले इलाकों में हल्की बारिश हुई। हालांकि बर्फबारी से मुनस्यारी को छोड़कर अन्य क्षेत्रों में शीतलहर जैसा कोई असर नहीं देखा गया। वहीं धारचूला में तड़के चार बजे से रुक-रुक कर बारिश हो रही है। इस कारण बिजली की आंखमिचौली भी जारी है।
बारिश से खिल उठे किसानों के चेहरे
सर्दी में सामान्य से भी कम बारिश होने से परेशान किसानों के चेहरे पर रविवार की बारिश कुछ खुशी लेकर आई। किसानों का कहना है कि रुक-रुक कर बारिश होती रहे तो फसलों में कुछ सुधार की उम्मीद है। किसान संगठन के अध्यक्ष सुभाष जोशी का कहना है कि अधिकतर फसलें सूखे के कारण पहले ही प्रभावित हो गई हैं। खेतों में बीज अंकुरित ही नहीं हो पाए हैं। उनका कहना है कि सरकार को किसानों को मुआवजा देना चाहिए। हल्की बारिश से जंगल की आग और धूल से भी राहत मिली है।