ग्लोबल वार्मिंग के चलते बदरीनाथ में बर्फ का तेजी से पिघलना आने वाले समय में पर्यावरण के लिए अशुभ संकेत हैं। दो दशक पहले जब बदरीनाथ धाम के कपाट खुलते थे, उस समय धाम बर्फ से पूरी तरह ढका रहता था। उसके बाद बर्फ पिघलनी शुरू होती थी। बर्फ के तेजी से पिघलने का असर ग्लेशियरों पर भी दिखाई देगा। बर्फ ग्लेशियर पर एक तरह से जैकेट का काम करती है, जो सूर्य के रेडिएशन को ग्लेशियर तक पहुंचने से रोकती है, लेकिन यह जैकेट खत्म होते जा रहे हैं, जिससे आने वाले समय में ग्लेशियर तेजी से पिघलेंगे जो पर्यावरण के लिए ठीक नहीं हैं।
- डॉ. मनीष मेहता, ग्लेशियर विशेषज्ञ व वैज्ञानिक, वाडिया इंस्टीट्यूट।