उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत करने की दिशा में यह बहुत बड़ा कदम है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में वेदर स्टेशन स्थापित होने के बाद हमें सटीक आंकड़े प्राप्त हो पाएंगे, जिससे सही समय पर अलर्ट जारी कर जान मान के नुकसान को कम किया जा सकेगा। - डॉ. रंजीत सिन्हा, सचिव आपदा प्रबंधन विभाग
वर्ष 2000 के बाद उत्तराखंड में हिमस्खलन की प्रमुख घटनाएं
वर्ष 2022 में उत्तरकाशी में डोकराणी बामक ग्लेशियर में हिमस्खलन की चपेट में आने 27 प्रशिक्षु पर्वतारोहियों की मौत।
वर्ष 2021 में त्रिशूल चोटी आरोहण के दौरान हिमस्खलन की चपेट में आए नौसेना के पांच पर्वतारोहियों सहित छह की मौत।
वर्ष 2021 में लंखागा दर्रे में हिमस्खलन से नौ पर्यटकों की मौत।
वर्ष 2019 में नंदादेवी चोटी के आरोहण के दौरान हिमस्खलन की चपेट में आने से चार विदेशी पर्वतारोही सहित आठ की मौत।
वर्ष 2016 में शिवलिंग चोटी पर दो विदेशी पर्वतारोहियों की मौत।
वर्ष 2012 में सतोपंथ ग्लेशियर पर क्रेवास में गिरकर आस्ट्रेलिया के एक पर्वतारोही मौत।
वर्ष 2012 में वासुकीताल के पास हिमस्खलन आने से बंगाल के पांच पर्यटकों की मौत।
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वर्ष 2008 में कालिंदीपास में हिमस्खलन आने से बंगाल के तीन पर्वतारोही और पांच पोर्टर की मौत।
वर्ष 2005 में सतोपंथ चोटी पर आरोहण के दौरान हिमस्खलन से सेना के एक पर्वतारोही की मौत।
वर्ष 2005 में चौखंभा में हिमस्खलन से पांच पर्वतारोहियों की मौत।
वर्ष 2004 में कालिंदीपास में हिमस्खलन से चार पर्वतरोहियों की मौत।
वर्ष 2004 में गंगोत्री-टू चोटी में हिमस्खलन से बंगाल के चार पर्वतारोहियों की मौत।