‘कुछ दिन बाद मैं एक डोली यात्रा लेकर पहाड़ की ओर निकलूंगा, आप लोगों को पानी पिलाते रहना। गर्मियां शुरू हो गई हैं। ऐसे में लोगों को परेशानी नहीं होनी चाहिए।’
जल संस्थान के अधिकारी- कर्मचारियों को निर्देशों की घुट्टी पिलाकर उत्तराखंड के पेयजल मंत्री ने उनकी मांगों पर आश्वासन का मरहम भी लगाया। कुछ मांगों के निस्तारण के लिए मौके पर ही मुख्य महाप्रबंधक को निर्देश दिए। राजकीयकरण की बड़ी मांग पर जून तक का समय मांगा। मौका था उत्तराखंड जल संस्थान कर्मचारी संघ के द्विवार्षिक अधिवेशन का।
सोमवार को देहरादून में सुभाष रोड स्थित गुरु नानक वेडिंग प्वाइंट में आयोजित अधिवेशन में पेयजल मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने कर्मचारियों की राजकीयकरण की मांग पर कहा कि इसे लेकर शासन में कमेटी बनाई गई है। जिसकी रिपोर्ट कैबिनेट में रखी जानी है। उम्मीद है कि इस दिशा में सकारात्मक कार्रवाई होगी।
उन्होंने कहा कि जून माह में राजकीयकरण के मुद्दे पर त्रिपक्षीय वार्ता की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनता की हमारे विभाग से बेहद उम्मीदें हैं, तो ऐसे में हमारा भी फर्ज बनता है कि हम उनकी उम्मीदों पर खरा उतरें।
इस मौके पर जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक एसके गुप्ता, एसके शर्मा, सुबोध कुमार, एलपी अदलखा, एसके जैन, डीपी पोखरियाल आदि अधिकारी उपस्थित थे। अधिवेशन में जल संस्थान कर्मचारी संघ के राज्यभर के कर्मचारी पहुंचे थे।
गिरीश अध्यक्ष, गजेंद्र बने महामंत्री
इस मौके पर संघ के प्रदेश और मंडल चुनाव भी हुए। जिसमें संघ के प्रदेश अध्यक्ष गिरीश चंद जोशी बने। महामंत्री गजेंद्र कपिल, उपाध्यक्ष फतेह सिंह और सुरेंद्र सिंह चुने गए। अशोक शर्मा कोषाध्यक्ष, रमेश चंद, श्रीकांत पांडे संयुक्त सचिव, शिव प्रसाद, हेमंत कुमार संगठन सचिव चुने गए।
हरभजन सिंह और मोहन चंद्र कार्यालय सचिव बने। लीलाधर मेहंदीरत्ता और कविंद्र मेहता प्रचार सचिव नियुक्त किए गए। मंडल अध्यक्ष जीतमणि सेमवाल, महासचिव रमेश बिंजौला, उपाध्यक्ष दिनेश भट्ट और रामचंद्र सेमवाल चुने गए। कोषाध्यक्ष ललित नेगी बने।
ये रखीं प्रमुख मांगें
राजकीयकरण, पद्दोन्नति, पीएफ खाते जीपीएफ भत्ते के रूप में संचालित किए जाने आदि।