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Uttarakhand: विधानसभा से बर्खास्त कर्मचारियों को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, स्पीकर के आदेश को बताया सही

Thu, 24 Nov 2022 11:58 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

उत्तराखंड विधानसभा में हुईं भर्तियों की जांच के लिए बनी तीन सदस्यीय विशेषज्ञ जांच समिति की रिपोर्ट की सिफारिश के आधार पर 2016 में हुईं 150 तदर्थ नियुक्तियां, 2020 में हुईं छह तदर्थ नियुक्तियां, 2021 में हुईं 72 तदर्थ नियुक्तियां और उपनल के माध्यम से हुईं 22 नियुक्तियां रद्द की गई थी।
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विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूरी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नैनीताल हाईकोर्ट ने उत्तराखंड विधानसभा सचिवालय से बर्खास्त कर्मचारियों को बहाल करने के एकलपीठ के आदेश को निरस्त कर दिया है। अदालत ने इन कर्मियों को बर्खास्त करने के विधानसभा सचिवालय के आदेश को सही ठहराया। मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने कहा कि बर्खास्तगी के आदेश को स्थगित नहीं किया जा सकता है।

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विस सचिवालय से बर्खास्त कर्मचारी बबिता भंडारी, भूपेंद्र सिंह बिष्ट, कुलदीप सिंह व 102 अन्य की ओर से दायर याचिका पर हाईकोर्ट की एकलपीठ ने इन कर्मियों को बहाल करने के आदेश दिए थे। इसके बाद विधानसभा सचिवालय की ओर से स्पेशल अपीलों के जरिये बहाली आदेश को खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी गई थी। कहा था कि इनकी नियुक्ति कामचलाऊ व्यवस्था के तहत की गई थी। शर्तों के अनुसार इनकी सेवाएं कभी भी बिना नोटिस और बिना कारण के समाप्त की जा सकती हैं। खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश को निरस्त करते हुए विधानसभा सचिवालय के आदेश को सही ठहराया है। 

बर्खास्त कर्मियों ने ये तर्क दिया था
विस सचिवालय से बर्खास्त कर्मियों की ओर से दायर याचिकाओं में कहा गया था कि विधान सभा अध्यक्ष ने लोकहित का हवाला देते हुए उनकी सेवाएं 27, 28 , 29 सितंबर को समाप्त कर दीं। बर्खास्तगी आदेश में उन्हें हटाने का आधार और कारण का उल्लेख नहीं किया गया और न ही उन्हें सुना गया जबकि उन्होंने सचिवालय में नियमित कर्मचारियों की तरह कार्य किया है। एक साथ इतने कर्मचारियों को बर्खास्त करना लोकहित नहीं है। यह आदेश विधि विरुद्ध है। याचियों का कहना था कि विधान सभा सचिवालय में 396 पदों पर बैक डोर नियुक्तियां 2002 से 2015 के बीच में भी हुईं जिनको नियमित किया जा चुका है। 2014 तक तदर्थ रूप से नियुक्त कर्मचारियों को चार वर्ष से कम की सेवा में नियमित नियुक्ति दे दी गई लेकिन उन्हें छह वर्ष के बाद भी स्थायी नहीं किया। अब उन्हें हटा दिया गया। 

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विस अध्यक्ष ने 228 कर्मियों को किया था बर्खास्त
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण ने पूर्व प्रमुख सचिव डीके कोटिया की अध्यक्षता में बनाई समिति की सिफारिशों के आधार पर 228 कर्मचारियों को बर्खास्त किया था। बीते अक्टूबर में नैनीताल हाईकोर्ट ने विधानसभा सचिवालय के कर्मचारियों की बर्खास्तगी के 27, 28 व 29 सितंबर को जारी आदेश पर रोक लगा दी थी। 

सीएम ने की थी पहल
विधानसभा में बैकडोर एंट्री पर लगे कर्मचारियों को हटाने की कार्रवाई सीएम पुष्कर सिंह धामी की पहल के बाद हुई थी। कार्रवाई के लिए उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अनुरोध किया था। जांच के बाद कर्मियों को हटाने की फाइल आते ही उन्होंने अनुमोदन दे दिया था।

खंडपीठ का निर्णय न्याय की जीत है। सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित कभी नहीं हो सकता। विधानसभा के हित, सदन की गरिमा और प्रदेश के युवाओं को न्याय दिलाने के लिए इस प्रकरण पर अंतिम निर्णय तक लड़ा लाएगा।
- ऋतु खंडूड़ी, अध्यक्ष, विधानसभा
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