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घूस के आरोप में उत्तरकाशी डीसीबी का जीएम निलंबित, सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट से जुड़ा हुआ है मामला

Wed, 24 Jun 2020 10:33 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • जांच अधिकारी नियुक्त, उत्तरकाशी और ऊधमसिंह नगर डीसीबी से रिकवरी का भी आदेश जारी
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- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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उत्तराखंड सहकारिता विभाग में बैंक लोन के नाम पर पैसे मांगने के आरोप में उत्तरकाशी डिस्ट्रिक्ट कॉपरेटिव बैंक (डीसीबी) के जीएम सुरेंद्र प्रभाकर को निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही सहकारिता विभाग ने उत्तरकाशी और ऊधमसिंह नगर जिला सहकारी बैंकों से रिकवरी के आदेश भी जारी कर दिए हैं। इन पर आरोप है कि बोर्ड सदस्यों को बिना अनुमति के सैर कराई गई। 

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बैंक लोन को स्वीकृत करने के मामले में पैसे मांगने का मामला मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट से जुड़ा हुआ है। उत्तरकाशी के आमोद पंवार ने सौर ऊर्जा के तहत 200 किलोवाट का प्लांट लगाने के लिए राज्य सहकारी बैंक से कर्ज लिया था। इसमें सहकारिता विभाग ने कंसोर्टियम के तहत 80 लाख का लोन स्वीकृत किया था, इसमेें 40 लाख रुपये उत्तरकाशी डीसीबी को देने थे। आरोप है कि प्रभाकर ने इस मामले को लटकाए रखा और साफ तौर पर पैसे मांगे।


आरोप यह भी है कि प्रभाकर ने कहा कि यह पैसा उच्च अधिकारियों तक भी पहुंचाया जाएगा। आमोद ने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से की और मामला सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत तक भी जा पहुंचा। इस पर मंत्री ने बैठक बुला ली। विधानसभा मेें हुई बैठक में सहकारिता विभाग के अधिकारियों के सामने आमोद ने एक-एक का कच्चा चिट्ठा खोला। 

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चार लाख रुपये मांगे गए

बैठक में मौजूद प्रभाकर के सामने ही आमोद ने कहा कि चार लाख रुपये मांगे गए। इस पर सहकारिता मंत्री सक्रिय हुए। आमोद की शिकायत के बाद प्रभाकर को निलंबित कर दिया गया। वहीं, निबंधक बीएम मिश्र ने बताया कि इस मामले में अपर निबंधक आनंद शुक्ला जांच अधिकारी बनाए गए हैं। उनसे जांच को तय समय पर पूरी करने को कहा गया है।

उत्तरकाशी व यूएसनगर डीसीबी से रिकवरी के आदेश
निबंधक बीएम मिश्र के मुताबिक उत्तरकाशी और ऊधमसिंह नगर के बोर्ड सदस्यों को सरकारी खर्च पर गोवा आदि की सैर कराई गई। यह मामला सोशल मीडिया में भी उछला था। इस मामले में दोनों बैंकों से रिकवरी का आदेश जारी किया गया है। इस मामले की भी विस्तृत जांच होगी।

झबरेड़ा सहकारी समिति का एडीओ भी निलंबित
निबंधक के मुताबिक झबरेड़ा की एक सहकारी समिति में 22 लाख की फर्जी लूट का मामला सामने आया था। इस मामले में नियमित रूप से निरीक्षण न करने के आरोप में एडीओ को भी निलंबित किया गया है। इसी के साथ चेतावनी जारी की गई है कि निरीक्षण आदि में किसी तरह की कोताही न बरती जाए।
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