अब छात्रसंघ चुनाव जिला प्रशासन की निगरानी में होंगे। चुनाव में गड़बड़ी होने पर जिला प्रशासन की ओर से नियुक्त पर्यवेक्षक को चुनाव प्रक्रिया निरस्त करने का अधिकार होगा।
चुनाव में प्रत्याशी पांच हजार नहीं बल्कि 25 हजार रुपये खर्च कर सकेगा। सोमवार को लिंगदोह समिति की सिफारिशों में संशोधन के लिए गठित समिति ने यह सिफारिश सरकार से की। समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत को सौंप दी है। सरकार इसी साल से यह नियम लागू करने जा रही है।
उत्तराखंड आवासीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एचएस धामी की अध्यक्षता में तकनीकी विवि में समिति ने सोमवार को बैठक की। बैठक में समिति के सदस्य एवं श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विवि के कुलपति डॉ. उदय सिंह रावत, कुमाऊं विवि के कुलपति प्रतिनिधि प्रो. आरएस पथनी, उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. जेसी घिल्डियाल, उच्च शिक्षा विधिक सलाहकार डॉ. दिनेश चंद्र गोस्वामी, गढ़वाल विश्वविद्यालय महासंघ के अध्यक्ष प्रदीप जोशी शामिल हुए।
कुमाऊं विश्वविद्यालय महासंघ के अध्यक्ष पुष्कर सिंह फोन पर बैठक में शामिल हुए। बैठक में लिंगदोह समिति की सिफारिशों में परिवर्तन को कुल 15 बिंदुओं पर सहमति बनी, जिसकी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई है। इसके मुताबिक अब छात्रसंघ चुनाव में पदाधिकारी को पांच हजार रुपये के बजाए 25 हजार रुपये खर्च करने की छूट होगी। गढ़वाल और कुमाऊं में एक ही दिन छात्रसंघ चुनाव आयोजित कराए जाएंगे। सभी जिलों में महाविद्यालयों के छात्रसंघ चुनाव में स्थानीय प्रशासन या जिला प्रशासन की ओर से नियुक्त पर्यवेक्षक निगरानी करेंगे। अगर कहीं गड़बड़ पाई गई तो पर्यवेक्षक के पास चुनाव प्रक्रिया निरस्त करने का अधिकार होगा।