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इस दीपावली पर दीजिए पहाड़ी मिठाई की सौगात

Mon, 02 Nov 2015 03:40 PM IST
अनिल चंदोला/ अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों के हर छोटे-बड़े आयोजन और पर्व में बनाए जाने वाला पारंपरिक अरसा (पहाड़ी मिठाई) अब आप दिवाली की मिठाई के तौर पर दे सकते हैं।
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इंदिरा अम्मा कैंटीन में पहली बार अरसों को व्यावसायिक स्तर पर मेन्यू में शामिल किया गया है। कैंटीन का संचालन कर रही राजलक्ष्मी महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं त्योहारी मौसम में लोगों को यह मीठी सौगात के तौर पर देंगी।

त्योहारों के मौसम में बाजार में मिठाई की मांग बढ़ जाती है। पहाड़ों में त्योहार अरसे के बिना अधूरे माने जाते हैं। हर त्योहार में मिठाई के रूप में अरसे बांटे जाते हैं। शादी-विवाह समेत अन्य शुभ अवसरों पर भी अरसे बनाने की परंपरा है। पहाड़ में मिठाई के तौर पर भी अरसे को देने का रिवाज हैं।
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पहाड़ से आने वाले लोग आज भी अपने परिजनों को सौगात के तौर पर अरसे देते हैं। लेकिन बाजार के बढ़ते प्रभाव और बाहर से आने वाली मिठाइयों के चलते अरसे का चलन कम हो गया है। लोग अब डिब्बा बंद मिठाइयां खरीदना ज्यादा पसंद करने लगे हैं। अब इंदिरा अम्मा कैंटीन लोगों को अरसे की सौगात देने जा रही है।

कैंटीन का संचालन कर रही राजलक्ष्मी महिला स्वयं सहायता समूह की पूजा द्विवेदी ने बताया कि त्योहारों को देखते हुए अरसे तैयार करने की योजना है। बताया कि बड़ी संख्या में पहाड़ के लोग अरसे की मांग कर रहे हैं। बाजार में बिकने वाली मिठाइयों में मिलावट की आशंका को देखते हुए लोगों का रुझान इसकी तरफ है। वैसे भी अरसे शुद्ध, सस्ते और सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं।
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चावल से बनते हैं अरसे
पारंपरिक पहाड़ी मिठाई अरसे बनाने के लिए चावल को पहले भिगोया जाता है। उसके ओखली में कूटने के बाद बारीक किया जाता है। गुड़ का घोल (पाक) बनाकर चावल को मिलाया जाता है। उनकी छोटी-छोटी लोइयां बनाकर तेल में तली जाती हैं। इस तरह अरसे बन जाते हैं।
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