जलभराव वाले क्षेत्रों में जलनिकासी की व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश
जलभराव वाले क्षेत्रों में प्रभावी जलनिकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ ही पंप और अन्य आवश्यक उपकरण पर्याप्त संख्या में उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ पूरी सतर्कता और संवेदनशीलता से काम करने को कहा।
उन्होंने बिजली, पेयजल और संचार सेवाओं की बहाली को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। यदि कहीं भी ये सेवाएं प्रभावित होती हैं तो अतिरिक्त टीमें तत्काल भेजी जाएं और वैकल्पिक व्यवस्थाएं लागू कर आमजन को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
सभी जिलों में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, विद्युत, पेयजल, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति समेत सभी संबंधित विभागों को पूर्ण समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए। दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में खाद्यान्न, दवाइयों, ईंधन तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त भंडारण पहले से सुनिश्चित करने को कहा गया, ताकि सड़क बंद होने की स्थिति में स्थानीय लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
मौसम और मार्ग की स्थिति के आधार पर हो यात्रा संचालन
मदन कौशिक ने निर्देश दिए कि मौसम की वास्तविक स्थिति और मार्ग की स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही यात्रा का संचालन किया जाए। अत्यधिक वर्षा अथवा मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोककर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। परिस्थितियां सामान्य होने के बाद ही यात्रियों को आगे भेजा जाए।
नदियों के जलस्तर पर 24 घंटे निगरानी
मंत्री ने नदियों के जलस्तर पर 24 घंटे निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए। नदी तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को लगातार जागरूक करने और खतरे की आशंका होने पर उन्हें समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि डैम और बैराज से पानी छोड़े जाने की स्थिति में डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पूर्व सूचना देकर सतर्क किया जाए। आवश्यकता पड़ने पर सीमावर्ती राज्यों को भी समय रहते अलर्ट किया जाए, ताकि संभावित जोखिम को न्यूनतम किया जा सके।
वैकल्पिक संचार व्यवस्था हर समय रहे तैयार
भारी वर्षा या भूस्खलन के कारण किसी क्षेत्र में संचार व्यवस्था बाधित होने की स्थिति में वैकल्पिक संचार प्रणाली तत्काल सक्रिय करने के निर्देश दिए गए। दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में वैकल्पिक संचार व्यवस्था