विजय हजारे ट्रॉफी के दौरान जीएम सब करीम से राय
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विजय हजारे ट्रॉफी के पहले मुकाबले में बृहस्पतिवार को भले ही उत्तराखंड की टीम को शिकस्त झेलनी पड़ी हो लेकिन यह दिन प्रदेश के हर क्रिकेट प्रेमी के जेहन में लंबे समय तक याद रहेगा। इस दिन का सपना प्रदेश के लाखों लोगों ने देखा था। हालांकि चारों एसोसिएशनों के झगड़े के चलते राज्य के लिए यह शुभ मौका 18 साल बाद आया है।
राज्य गठन के बाद से ही प्रदेश को बीसीसीआई की मान्यता दिलाने के प्रयास हुए। हालांकि राज्य में कार्यरत चारों क्रिकेट एसोसिएशनों ने आपसी झगड़े के चलते कभी इस ओर नहीं सोचा।
पिछले डेढ़ सालों के दौरान मान्यता के प्रयासों में तेजी आई। मौजूदा खेल मंत्री अरविंद पांडेय ने व्यक्तिगत तौर पर दिलचस्पी लेते हुए सभी संघों को एकजुट करने का प्रयास किया। हालांकि कुछ संघ पदाधिकारियों की हठधर्मिता के चलते उनका प्रयास सफल नहीं हो पाया। इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के चलते उत्तराखंड समेत कई राज्यों को पहली बार घरेलू सत्र की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का मौका मिला है।
कई क्रिकेटरों ने दिखाया दम
राज्य को बीसीसीआई की मान्यता न होने के चलते क्रिकेटरों को दूसरे राज्यों की खाक छाननी पड़ी। प्रदेश की प्रतिभाओं ने अपने शानदार खेल से उन राज्यों की टीमों में भी जगह बनाई। प्रदेश के कई खिलाड़ी भारतीय टीम में भी जगह बनाने में कामयाब हुए। इसके अलावा कई राज्यों की टीमों में भी उत्तराखंड के खिलाड़ी शामिल हैं।
बीसीसीआई अधिकारियों ने दी शुभकामनाएं
पहली बार मैदान में उतर रही उत्तराखंड की टीम को कई बीसीसीआई अधिकारियों ने भी शुभकामनाएं दी। भारतीय टीम के मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद ने भी खिलाड़ियों और टीम प्रबंधन को शुभकामनाएं दी। वहीं, क्रिकेट ऑपरेशन जीएम सबा करीम ने भी खिलाड़ियों से बातचीत की।