फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तराखंड: शिक्षकों ने तैयार की 14 गढ़वाली गीतों की श्रृंखला, प्रदेश की संस्कृति से रूबरू कराएंगे गीत

Thu, 06 Aug 2020 09:56 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उत्तरकाशी

सार

  • 14 गीतों की श्रृंखला सोशल मीडिया पर की रिलीज 
  • शिक्षा व लोक भाषा के प्रति रुचि विकसित करना है उद्देश्य 
विज्ञापन
शिक्षकों ने तैयार किए गढ़वाली गीत - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उत्तराखंड में सरकारी शिक्षकों के समूह द्वारा गढ़वाली गीतों के माध्यम से बच्चों को राज्य का संपूर्ण ज्ञान प्रदान करने की अनूठी पहल की गई है। समग्र शिक्षा के अंतर्गत राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) द्वारा तैयार 14 गीतों की इस श्रृंखला को सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर रिलीज किया गया है।

विज्ञापन


गीतों की रचना करने वाले एससीईआरटी के प्रवक्ता डॉ. नंदकिशोर हटवाल ने बताया कि करीब दो साल पहले हमने गढ़वाली गीतों को शिक्षा से जोड़ने की योजना बनाई थी, जिसके तहत चयनित शिक्षकों के समूह ने सामान्य ज्ञान के विभिन्न विषयों पर आधारित गढ़वाली गीत तैयार किए।

जिन्हें बीते सप्ताह एससीईआरटी के पाठ्यक्रम शोध एवं विकास विभाग द्वारा अपने यूट्यूब चैनल में लॉच किया है। गीतों को स्वर देने वाले समग्र शिक्षा नवाचारी विभाग के जिला समन्वयक ओम बधाणी ने बताया कि गीत श्रृंखला के माध्यम से उत्तराखंड के समग्र इतिहास के साथ ही विभिन्न गायन शैली, धुनों तथा वाद्य यंत्रों की जानकारी देने का भी प्रयास किया गया है। डॉ. हटवाल ने बताया कि प्रयोग सफल रहा तो कुमाऊंनी, जौनसारी बोली भाषाओं में भी गीत तैयार किए जाएंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

राज्य प्रतीक चिह्नों पर आधारित हैं गीत

ओम बधाणी ने बताया कि 14 गीतों की इस श्रृंखला के माध्यम से बच्चों को उत्तराखंड राज्य के इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व वीर सपूतों, वन्यजीवों व वनस्पतियों, नदियों, पर्वत श्रृंखलाओं, ताल व झीलों, धार्मिक स्थलों, जनजातियों, मेले, ग्लेशियरों, दर्रों, पर्यटन स्थलों आदि की जानकारी मिल सकेगी। 

कविता संग्रह ‘आखर’ का होगा लोकार्पण 
गढ़वाली की पहली कवियत्रि विद्यावती डोभाल को समर्पित वृहद कविता संग्रह ‘आखर’ का शीघ्र लोकार्पण किया जाएगा। आखर समिति के अध्यक्ष व गढ़वाली भाषा के लेखक शिक्षक संदीप रावत एवं सूरत (गुजरात) में रहने वाले युवा साहित्यकार गीतेश नेगी के संपादन में गढ़वाली कवियत्रियों की कविताओं का पहला संकलन आखर नाम से प्रकाशित किया जा चुका है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें