उत्तराखंड में गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) को प्रदेश के लिए फायदेमंद ही माना जा रहा है। प्रदेश जीएसटी को लागू करने के लिए 2012 में ही सहमति दे चुका है। अब 26 दिसंबर को केंद्र में प्रस्तावित बैठक में राज्य जीएसटी को लागू करने से पहले राज्यों के अधिकार को सुनिश्चित करने का मुद्दा जरूर उठा सकता है।
प्रदेश सरकार का मानना है कि उपभोक्ता राज्य होने के कारण राज्य को जीएसटी में राजस्व का नुकसान नहीं होगा। इतना जरूर है कि जीएसटी के तहत राज्य के कर लगाने के अधिकार पर स्थिति स्पष्ट न होने की बात की जा रही है।
26 दिसंबर को दिल्ली में होने वाली बैठक में राज्य इस मामले को उठा सकता है। दूसरी चिंता आरएनआर(रेवेन्यू न्यूट्रल रेट) को लेकर है। वैट में यह कर की यह दर करीब 12.5 प्रतिशत थी जो अब 13.5 प्रतिशत हो चुकी है।
इस दर को बहुत अधिक रखा गया तो राज्य को महंगाई का सामना करना पड़ सकता है। उत्तराखंड को उपभोक्ता राज्य माना जाता है। ऐसे में आरएनआर अगर 16 प्रतिशत से अधिक होगा तो राज्य में वस्तुओं की कीमत में इजाफा हो सकता है।