वनाधिकार आंदोलन के प्रणेता व टिहरी के पूर्व विधायक किशोर उपाध्याय ने बताया कि बहुगुणा जी जब टिहरी में तीन धारे के पास टिहरी बांध के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे तो मैं उनसे मिलने गया। वह मेरे बारे में पहले से जानते थे और पहली बार हिमालय के पर्यावरणीय पहलुओं को उनसे बारीकी से समझा। 1991-92 में हिमालय के विकास के लिए सतत समावेशी नीति के बारे में, उत्तरकाशी को उसका मॉडल बनाने के लिए जब पूरा योजना आयोग टिहरी आया तो योजना आयोग के वरिष्ठ सलाहकार बीएन नवलावाला ने कहा कि टिहरी जाने पर मेरी पहली इच्छा बहुगुणा जी को मिलने की है।
इस तरह का था उनका व्यक्तित्व, जो सबको अपनी ओर खींच लाता था। टिहरी से विधायक चुने जाने के बाद सरकार के रंग-ढंगों और बांध विस्थापित और प्रभावितों की पीड़ा को उकेरने के लिए टिहरी के निकट भगवतपुरम में जब मैंने पहली महापंचायत आयोजित की तो उन्होंने उस प्रयास को भी आशीर्वाद दिया। ‘हिमालय बचाओ, गंगा बचाओ, जल बचाओ और जीवन बचाओ’ आंदोलन के बारे में जब उनसे, विमला जी व राजीव नयन जी से चर्चा की तो वे अस्वस्थ होने के बावजूद इस अभियान को आशीर्वाद देने के लिए तैयार हो गए। हम लोगों ने तीन चरणों में इस कार्यक्रम की रूपरेखा बनाई।
पहले चरण में हिमालयी राज्यों की सरकारों, जनप्रतिनिधियों और सिविल सोसाइटी से संवाद, दूसरे चरण में हिमालय से लाभान्वित होने वाले राज्यों पंजाब से प. बंगाल तक की सरकारों, जन प्रतिनिधियों व सिविल सोसाइटी से संवाद तथा तीसरे चरण में हिमालयी देशों जिसमें पाकिस्तान, अफगानिस्तान, भूटान, नेपाल, चीन, म्यांमार, बांग्लादेश आदि देश थे। वहां के निवासियों के साथ संवाद स्थापित करने की योजना थी। जम्मू-कश्मीर से अरुणाचल प्रदेश तक बहुगुणा जी अस्वस्थता के बावजूद गए।
सोनिया गांधी ने भेजा बहुगुणा के निधन पर शोक संदेश
कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा के निधन पर शोक जताते हुए उनकी पत्नी एवं परिजनों के नाम पर शोक संदेश भेजा। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय व प्रवक्ता गरिमा दसोनी ने कहा कि कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अपने शोक संदेश में कहा कि देश ने एक महान व्यक्ति को खो दिया है। जिन्होंने अहिंसक प्रतिरोध को अपने गांधीवादी मूल्यों से प्रेरित किया। बहुगुणा का जीवन उनका संदेश था। उनके उद्देश्य की पवित्रता, दृढ़ विश्वास, साहस, सोच उनके कार्य में दिखते थे।