बैठक के दौरान सचिव वित्त अमित सिंह नेगी ने राज्य की वित्तीय स्थिति पर प्रस्तुतीकरण दिया। इसके बाद आयोग ने व्यापार व उद्यमों के प्रतिनिधियों से भी राज्य के विभिन्न वित्तीय पक्षों पर सुझाव लिए। बैठक में आयोग के सदस्य शक्ति कांत दास, डॉ. अनूप सिंह, डा. अशोक लाहिड़ी, डा. रमेश चंद उपस्थित थे।
आयोग के साथ दो दिन चली बैठकों के दौरान सियासी दलों के प्रतिनिधियों और मुख्यमंत्री व वित्त मंत्री प्रदेश का जो दर्द बयान किया, उसका मजमून एक ही था कि14वें वित्त आयोग ने प्रदेश को बड़ा झटका दिया और उसे पांच साल में 47,278 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। इसके विपरीत उससे पहले 12वें और 13वें आयोग ने प्रदेश के वित्तीय प्रबंधन को सराहा और पांव पर खड़े होने के लिए वित्तीय सहायता दी।
आयोग ने सरकार की पीठ थपथपाई
इस दौरान आर्थिक, भौगोलिक और सामरिक चुनौतियों और कठिनाइयों के बावजूद प्रदेश की आर्थिक विकास दर और प्रति व्यक्ति आय को राष्ट्रीय औसत से अधिक बनाए रखने पर 15वें वित्त आयोग ने प्रदेश सरकार की पीठ थपथपाई।
15वें केंद्रीय वित्त आयोग ने उत्तराखंड को बड़ी राहत देने के संकेत दिए हैं। दो दिन चलीं मैराथन बैठकों के बाद आयोग अध्यक्ष एनके सिंह ने कहा कि पूर्व में राजस्व घाटे अनुदान से उत्तराखंड को क्षति हुई है। पूर्व के आयोग के राजस्व घाटा अनुदान के अनुमान वास्तविकता से परे है, लिहाजा इस मुद्दे पर नए सिरे से विचार किया जाएगा। गौरतलब है कि 14वें वित्त आयोग की सिफारिश के बाद उत्तराखंड को राजस्व घाटे अनुदान में 47 हजार करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति हुई थी। इस मसले को राज्य सरकार समेत विभिन्न राजनीतिक दलों ने आयोग के साथ हुई बैठक में प्रमुखता से उठाया था।
आयोग अध्यक्ष ने सचिवालय में आहूत संवाददाता सम्मेलन में उत्तराखंड के मुद्दों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार, राजनीतिक दलों, नगरीय-ग्रामीण निकाय प्रतिनिधियों के अलावा विभिन्न संगठनों ने आयोग को राज्य के विभिन्न ज्वलंत मुद्दों से अवगत कराया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड प्राकृतिक संपदाओं से भरपूर है लेकिन इसका राज्य को पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। पर्यटन और पारिस्थितिकी क्षेत्र में संतुलन स्थापित कर उत्तराखंड को नेचुरल हब के तौर पर विकसित किया जा सकता है। उन्होंने राज्य सरकार के प्रतिवेदन की तारीफ करते हुए कहा कि सभी राज्यों के राजस्व और व्यय के अध्ययन के बाद केंद्रीय वित्त आयोग अक्तूबर 2019 में अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देगा। आयोग की संस्तुतियां 2020 से 2025 तक लागू रहेंगी। इस दौरान आयोग सदस्य शक्तिकांत दास, डा. अशोक लाहिड़ी, डा. अनूप सिंह, डा. रमेश चंद्र मौजूद रहे।
आयोग अध्यक्ष ने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से राज्य को हुए राजस्व नुकसान का मामला भी उनके संज्ञान में लाया गया है लेकिन इस मुद्दे पर आयोग के हाथ बंधे हैं। यह उनके दायरे से बाहर है। जीएसटी से हुए नुकसान की भरपाई के लिए जीएसटी मंत्री समूह ही विचार कर सकता है। राज्य के प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और आधारभूत संरचना को मजबूत बनाने के लिए आयोग गंभीरता से विचार करेगा।
ग्रीन बोनस पर रुख साफ नहीं
अध्यक्ष ने माना कि उत्तराखंड में पर्यटन व पर्यावरणीय सेक्टर में सुधार की अपार गुंजाइश है। विभिन्न स्तर पर हुई बैठक में उठे ग्रीन बोनस के सवाल पर आयोग अध्यक्ष ने स्पष्ट आश्वासन देने की जगह कहा कि इस मुद्दे पर आयोग अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा है। अलबत्ता अध्यक्ष ने यह कहने से परहेज नहीं किया कि 14वें वित्त आयोग ने फारेस्ट कवर 7.5 प्रतिशत मार्किंग की है। इस प्रतिशत को और ज्यादा व्यापक बनाने की जरूरत है।
क्षेत्र पंचायतों को राहत की उम्मीद
14वें वित्त आयोग की सिफारिश के बाद क्षेत्र पंचायतों को बजट नहीं मिलने के सवाल पर अध्यक्ष ने त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था की मजबूती पर जोर देते हुए कहा कि अन्य राज्यों में आहूत बैठकों में भी यह मुद्दा उठा है। उन्होंने कहा कि आयोग ने इस पर गंभीर है और क्षेत्र पंचायत के समाप्त हुए बजट पर विशेष निर्णय लिया जाएगा।
क्षेत्रीय विषमता का मसला गंभीर
15वें केंद्रीय वित्त आयोग अध्यक्ष एनके सिंह ने कहा कि अन्य राज्यों महाराष्ट्र व तमिलनाडु की तरह उत्तराखंड में भई क्षेत्रीय विषमता का मसला बहुत गंभीर है। इसके अलावा प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर उत्तराखंड की आधारभूत संरचना, प्राकृतिक आपदा और विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए आयोग नए मानकों पर विचार करेगा।