बता दें कि राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देशित किया है कि गंगा-यमुना के किनारे बने होटलों, धर्मशालाओं व आश्रमों को बोर्ड में पंजीकृत किया जाए। एनजीटी के इस आदेश के बाद राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से सभी होटलों, धर्मशालाओं, आश्रमों के संचालकों को नोटिस जारी किया गया। जिसमें हिदायत दी गई कि बोर्ड में पंजीकरण प्राथमिकता के आधार पर कराया जाए।
पोखरियाल ने बताया कि फिलहाल पहले चरण में हरिद्वार और ऋषिकेश के 57 आश्रमों और 48 धर्मशालाओं के संचालकों को नोटिस जारी किया गया है। नोटिस जारी होने के बावजूद यदि संचालकों द्वारा पंजीकरण की प्रक्रिया जल्द नहीं अपनाई जाती है तो ऐसे सभी होटल, धर्मशाला और आश्रमों को सील कर दिया जाएगा।