सवाल: राज्य आंदोलनकारियों को एक समान नहीं बल्कि अलग-अलग पेंशन दी जा रही है। कुछ को 4500 तो कुछ को 6500 या इससे अधिक पेंशन मिल रही है।
जवाब: राज्य आंदोलनकारियों की पेंशन में वृद्धि के साथ ही एक समान पेंशन के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य में करीब 5000 आंदोलनकारी हैं। पूर्ण रूप से दिव्यांग दो आंदोलनकारियों को 20 हजार रुपये महीना पेंशन दी जा रही है। पहले पेंशन तीन महीने में जिला प्रशासन के माध्यम से मिलती थी। जबकि अब हर महीने कोषागार के माध्यम से मिल रही है। इसके अलावा पेंशन पट्टा दिए जाने की प्रक्रिया शुरु की गई है।त
सवाल:रामपुर तिराहा कांड के आरोपियों को अब तक सजा नहीं मिली। यहां मां, बहनों के साथ बुरा व्यवहार हुआ, आंदोलनकारियों पर लाठी के साथ ही गोलियां भी चलाई गई।
जवाब: रामपुर तिराहा कांड के पीडितों को न्याय मिलना चाहिए। मामला कोर्ट में है। सरकार ने दो अभियुक्तों को सजा दिलाई है। अन्य के खिलाफ सरकार पूरी तैयारी के साथ मामले की पैरवी कर रही है। गवाहों और पीडित महिलाओं के लिए भी विशेष प्रावधान करने का प्रयास किया जा रहा है।
सवाल: राज्य निर्माण में मातृ शक्ति की अहम भूमिका रही, लेकिन पारिवारिक पेंशन की वजह से कई महिला राज्य आंदोलनकारियों को सम्मान पेंशन नहीं मिल रही।
जवाब: पारिवारिक पेंशन की वजह से किसी महिला राज्य आंदोलनकारी की सम्मान पेंशन नहीं रुकनी चाहिए। सरकार उन्हें दोनों पेंशन देगी। राज्य आंदोलनकारियों को जो पेंशन दी जा रही है, वह पेंशन नहीं बल्कि सम्मान है। सांसद और सैन्यकर्मियों को भी दोहरी पेंशन मिलती है। ऐसे में सम्मान पेंशन से किसी महिला आंदोलनकारी को वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
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सवाल: उत्तराखंड आंदोलनकारी सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष के रूप में आपनी क्या प्राथमिकताएं हैं।
जवाब: छूट गए आंदोलनकारियों को राज्य आंदोलनकारी का दर्जा मिले, प्रमुख आंदोलनकारियों के जीवन परिचय को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। रामपुर तिराहा, खटीमा और मसूरी का कॉरिडोर बनाया जाए।