उत्तराखंड राज्य स्थापना के 25वें साल में प्रवेश कर गया है। प्रदेश को प्रगति और समृद्धि के मुकाम तक ले जाने के लिए हमें सिर्फ पांच क्षेत्रों को चयनित कर उस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। ये क्षेत्र उद्यान, पशुपालन, वानिकी, पर्यटन और ऊर्जा हो सकते हैं।
यह कहना है राज्य आंदोलनकारियों का। उनका कहना है ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी परियोजनाएं बन रही हैं जिससे विस्थापन के साथ ही संतुलित विकास हो रहा है। इसके स्थान पर छोटी परियोजनाएं बननी चाहिए ताकि न विस्थापन हो न असंतुलित विकास।
वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी रविंद्र जुगरान के मुताबिक अलग राज्य बड़े संघर्षों के बाद मिला है। 42 से अधिक लोगों ने अपनी शहादत दी। विभिन्न गोलीकांड में 100 से अधिक लोग घायल हुए। हजारों लोग लाठीचार्ज में घायल हुए करीब एक हजार लोग जेल गए।
टिहरी डेम से 25 प्रतिशत रॉयल्टी उत्तराखंड को मिलनी चाहिए
इसके बावजूद राज्य आंदोलनकारियों के सपने आज भी अधूरे हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि इन 25 वर्षों में हम यह तय नहीं कर पाए कि किस दिशा में हमें आगे बढ़ना है। हमें प्रगति और समृद्धि के लिए पांच क्षेत्रों चिह्नित कर उन पर फोकस करना चाहिए।
उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी बताते हैं कि सबसे पहले भ्रष्टाचार पर चोट के लिए लोकायुक्त की नियुक्ति की जानी चाहिए। राज्य में 2011 के बाद से लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं हुई। टिहरी डेम से 25 प्रतिशत रॉयल्टी उत्तराखंड को मिलनी चाहिए।
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इसके लिए ठोस पैरवी की जानी चाहिए। उत्तराखंड क्रांति दल के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष दिवाकर भट्ट बताते हैं कि मूल निवास और सशक्त भू-कानून के मसले पर चर्चा होनी चाहिए कि आखिर हम क्या चाहते हैं। इस मसले को जनता के बीच ले जाने के बाद ही इस पर कोई निर्णय लिया जाना चाहिए।