औली में शाही शादी समारोह संपन्न होने के बाद अब सबकी निगाहें आयोजन से औली को हुए नफा-नुकसान पर टिकी हैं। जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से इसकी रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की जाएगी। हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को सात जुलाई तक शादी से पर्यावरण को हुए नुकसान पर अपनी रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं।
काशीपुर के अधिवक्ता रक्षित जोशी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर शादी के लिए औली में दी गई अनुमति को चुनौती दी थी। उन्होंने शादी समारोह को पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करार दिया, जिसके बाद यह शादी पूरी तरह से हाईकोर्ट के पहरे के बीच संपन्न हुई। हाईकोर्ट ने आदेश दिए थे कि चमोली के डीएम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर्यावरण मानकों के पालन की निगरानी करें और सात जुलाई तक कोर्ट में रिपोर्ट पेश करें।
इसके बाद शादी समारोह में जिला प्रशासन की टीम और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम भी सक्रिय रही। शादी समारोह संपन्न होने के बाद रविवार को प्रशासन की टीम फिर औली पहुंची। जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने कहा कि शादी समारोह की प्रत्येक दिन की रिपोर्ट तैयार की गई है। ड्रोन से लेकर फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी से शादी समारोह पर नजर रखी गई। सात जुलाई तक रिपोर्ट उच्च न्यायालय को सौंप दी जाएगी।
औली में 200 करोड़ की लागत से संपन्न हुई गुप्ता बंधुओं के बेटों के शाही शादी से स्थानीय लोग खफा है। लोगों का कहना है कि शादी समारोह को देखने पहुंचे स्थानीय लोगों को पानी तक के लिए भी नहीं पूछा गया।
रविग्राम गांव की महिलाओं ने कहा कि उनके गांव के बीचों बीच स्थित हैलीपेड पर 18 से 23 जून तक गुप्ता बंधुओं के हेलीकॉप्टर दिनभर आवाजाही कर रहे थे, जिससे क्षेत्र में ध्वनि प्रदूषण हो रहा था। लेकिन ग्रामीणों ने औली में वेडिंग डेस्टिनेशन को देखते हुए हेलीकॉप्टरों की अत्यधिक आवाजाही पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
लेकिन शादी समारोह के दौरान उन्हें औली में पानी तक के लिए नहीं पूछा गया। सावित्री देवी, गुड्डी देवी और कुंती देवी का कहना है कि अन्य गांवों के ग्रामीणों के साथ वे भी शादी समारोह को देखने के लिए वे औली पहुंचे थे, लेकिन उन्हें पानी तक के लिए नहीं पूछा गया।