फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बाघ संरक्षण में उत्तराखंड ने विश्व में बनाई पहचान

Thu, 27 Jul 2017 01:45 PM IST
अंकुर शर्मा / अमर उजाला, हल्द्वानी
विज्ञापन
tiger
विज्ञापन
उत्तराखंड ने बाघ संरक्षण में देश ही नहीं बल्कि विश्व में भी पहचान बनाई है। लैंसडाउन वन प्रभाग कंजर्वेशन एश्योरड टाइगर स्टैंड्डर्स (कैट्स) के बाघ संरक्षण के सभी मानकों पर खरा उतरा है।
विज्ञापन


यह दुनिया का पहला वन प्रभाग है जिसे कैट्स ने मान्यता दी है। अब तक नेपाल के चितवन पार्क और रूस के सुखोतलिन नेचर रिजर्व को ही इस संस्था की मान्यता मिली है।

बाघ को संरक्षित करने के लिए दुनिया के 13 देशों ने वैश्विक स्तर पर बाघ संरक्षण के लिए एक फोरम कैट्स का गठन किया है। इसमें नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथारिटी, ग्लोबल टाइगर फोरम, डब्ल्यू डब्ल्यू एफ समेत कई नामी गिरामी संस्थाएं जुड़ी हैं। कैट्स दुनिया में बाघ के होने वाले शिकार, कुनबे में बढ़ोत्तरी आदि की निगरानी करती है।
विज्ञापन


बाघ संरक्षण के लिए कड़े मानक बनाए
कैट्स ने बाघ संरक्षण के लिए कड़े मानक बनाए हैं। इन मानकों में बाघों की जीपीएस गणना से वन चौकियों में शौचालय तक का ध्यान रखा गया है। हाल ही में कैट्स ने दुनिया के सभी वन प्रभागों से कैट्स मान्यता के लिए आवेदन मांगा था। इसमें मानकों के अनुसार बाघ संरक्षण का महत्व और वर्तमान स्थिति, प्रबंधन, समुदाय, पर्यटन, सुरक्षा, पारिस्थितिक प्रबंधन, बाघों का कुनबा समेत सात बिंदुओं पर 150 से अधिक सूचनाएं मांगी गई।

इसमें भारत के उत्तराखंड समेत कई प्रदेशों ने हिस्सा लिया था। लैंसडाउन वन प्रभाग ने कैट्स ने सभी सूचनाओं को उपलब्ध कराया। इन सूचनाओं की कैट्स की राष्ट्रीय स्तर की कमेटी ने जांच की। यहां से मुहर लगने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर की कमेटी ने मानकों को जांच की। यहां डीएफओ नीतिश मणि त्रिपाठी ने प्रस्तुतीकरण दिया। बाघ सुरक्षा के पैमाने पूरे होने पर अंतरराष्ट्रीय कमेटी ने लैंसडाउन वन प्रभाग को कैट्स की मान्यता दी है। 

29 को नई दिल्ली में दिया जाएगा सम्मान
29 जुलाई को ग्लोबल बाघ दिवस के मौके पर उत्तराखंड को नई दिल्ली विज्ञान भवन में कैटस से मिली मंजूरी का सर्टिफिकेट प्रदान किया जाएगा। भारत सरकार के वन्य एवं पर्यावरण मंत्री, महानिदेशक वन यह सर्टिफिकेट देंगे। इस समारोह में प्रदेश के वन मंत्री, प्रमुख वन्य जीव संरक्षक, लैंसडाउन के पूर्व डीएफओ नीतिश मणि त्रिपाठी हिस्सा लेंगे।  

कैट्स की मान्यता के ये होंगे फायदे
कैट्स की मान्यता मिलने के बाद लैंसडाउन वन प्रभाग को बाघ संरक्षण में अंतररष्ट्रीय स्तर पर ख्याति मिलेगी। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण आमतौर पर रिजर्व पार्क आदि को ही बाघ संरक्षण के लिए फंड देता है। कैटस की मुहर के बाद लैंसडाउन वन प्रभाग को बाघ संरक्षण के लिए फंड मिलेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें