यूपीसीएल के आकलन में वर्ष 2030-31 में लगभग सभी महीनों में 446 मेगावाट से 1311 मेगावाट तक बिजली की कमी रहेगी। इस दौरान तक 1320 मेगावाट की आपूर्ति शुरू हो जाएगी। इससे उत्तराखंड ऊर्जा में सरप्लस राज्य बन जाएगा।
हाइड्रो और सोलर से बेहतर है थर्मल का विकल्प
हाइड्रो पावर प्लांट में बिजली उत्पादन नदियों में पानी के बहाव पर निर्भर करता है। सर्दियों में बर्फबारी के कारण और बरसात में सिल्ट आने के कारण ये उत्पादन प्रभावित होता है। वहीं, सोलर प्लांट में केवल दिन के समय ही बिजली उपलब्ध होती है। लिहाजा, थर्मल पावर प्लांट इस मामले में फायदे का सौदा है। पीक आवर में भी इससे आसानी से बिजली आपूर्ति हो सकेगी।