फर्जी तरीके से एससी एसटी वर्ग के छात्रों की छात्रवृत्ति हड़पने के आरोप में देहरादून के दो बड़े शिक्षण संस्थानों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। इनमें जीआरडी इंस्टीट्यूट राजपुर रोड और चकराता रोड स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट शामिल हैं
दोनों संस्थानों को लगभग छह करोड़ रुपये से भी ज्यादा की छात्रवृत्ति जारी की गई थी। आरोप है कि दोनों संस्थानों ने यह राशि फर्जी तरीके से एडमिशन दिखाकर हड़प कर ली। आईपीएस मंजूनाथ टीसी की अध्यक्षता में चल रही एसआईटी जांच में इन संस्थानों के खिलाफ कई प्रकार के साक्ष्य मिले हैं।
फेल छात्र-छात्राओं के नाम पर भी लिया छात्रवृत्ति का पैसा
केस-1: इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजेंट
इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजेंट के खिलाफ कैंट थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। वर्ष 2011-12 से 2016-17 तक कुल 98 लाख रुपये से अधिक की राशि संस्थान और छात्रों के खातों में दी गई थी। एसआईटी की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
- वर्ष 2013-14 में अनुसूचित जनजाति के बीएससी एनिमेशन के 17 छात्रों के सापेक्ष कोई भी छात्र पास नहीं था।
- वर्ष 2013-14 में अनुसूचित जनजाति के बी-लिब पाठ्यक्रम के 30 छात्रों के सापेक्ष केवल चार छात्र ही पास थे।
- तीन कथित छात्राओं ने पूछताछ में बताया कि इस संस्थान में उन्होंने कभी प्रवेश लिया ही नहीं।
- कथित छात्राओं के बैंक अकाउंट के फार्म उन्हें दिखाए तो उन्होंने बताया कि ये खाते कभी नहीं खुलवाए गए। फार्म पर हस्ताक्षर भी इन छात्राओं के नहीं थे।
- अधिकतर छात्र-छात्राओं ने बताया कि उन्होंने बी-लिब कोर्स में प्रवेश की औपचारिकता की थी। इसके बाद कॉलेज ने उनसे कभी संपर्क नहीं किया और न ही वे कभी पढ़ने ही गए।
नाम छात्रों का खाते इंस्टीट्यूट के
केस-2: जीआरडी इंस्टीट्यूट राजपुर रोड
जीआरडी इंस्टीट्यूट के खिलाफ राजपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। संस्थान को 2011-12 से 2016-17 तक पांच करोड़ 41 लाख रुपये जारी किए गए। समाज कल्याण विभाग को जो लिस्ट भेजी गई उसमें नाम तो छात्रों के थे, लेकिन खाते इंस्टीट्यूट के ही थे। एसआईटी जांच में कई और गड़बड़ियां सामने आई हैं।
- 2012-13 में अनुसूचित जनजाति के एमबीए के सात छात्रों के सापेक्ष चार छात्रों का ही पंजीकरण था।
- 2013-14 में एमबीए के 38 छात्रों के मुकाबले 27 छात्रों का पंजीकरण ही पाया गया और अंतिम वर्ष में केवल सात छात्र ही पास थे।
- वर्ष 2015-16 में एमबीए के 11 छात्रों में से कोई भी पास नहीं था।
- 2016-17 में बीटेक के 22 छात्रों में से केवल 12 का ही पंजीकरण था।
- इंस्टीट्यूट ने 102 छात्र-छात्राओं के खातों का विवरण दिया था, इनमें से 11 छात्र ऐसे थे जिनके नामों के आगे दर्ज खाता संख्या संस्थान की थी।