दशमोत्तर छात्रवृत्ति घोटाले में हरियाणा और यूपी के सात शैक्षिक संस्थान और फंस गए हैं। एसआईटी ने इन शैक्षिक संस्थानों में दर्शाए गए विद्यार्थियों के दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन करने में भारी अनियमितताओं का खुलासा किया है। सभी संस्थानों पर केस दर्ज करने के लिए एसआईटी ने पीएचक्यू को रिपोर्ट भेज दी है। एसआईटी सूत्रों की मानें तो सात मुकदमे दर्ज होने के बाद बाहरी संस्थानों की जांच को बंद कर दिया जाएगा।
जिले के तीन हजार एससी-एसटी और ओबीसी छात्र-छात्राओं को बाहरी शैक्षिक संस्थानों में दाखिला दिखाकर फर्जी कोर्स कराने का खुलासा होने पर एसआईटी जांच बैठाई गई थी। वर्ष 2019 से शुरू हुई जांच के बाद आए दिन नए खुलासे होते रहे हैं। संस्थानों में जिन विद्यार्थियों का प्रवेश दिखाया गया था, वे कभी संस्थान नहीं गए थे। विद्यार्थियों को कोर्स कराने के नाम पर करोड़ों रुपये बांटे गए थे लेकिन उनके बैंक खाते में कोई धनराशि पहुंची ही नहीं थी। जिन विद्यार्थियों के खाते में धनराशि पहुंची तो दलालों ने उक्त राशि को गलती से आने की बात कहकर वापस ले लिया।
एसआईटी ने बाहरी राज्यों में दर्शाए 2900 सौ विद्यार्थियों के दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन कर लिया है। इसमें दो हजार से अधिक छात्र-छात्राओं के नाम पर फर्जीवाड़ा सामने आ चुका है। घोटाले में लिप्त बाहरी राज्यों के 39 शैक्षिक संस्थान और 55 दलालों के खिलाफ जिले के विभिन्न थाना एवं चौकी में केस दर्ज हो चुके हैं।
अब तक एसआईटी विद्यार्थियों के दस्तावेजों में छेड़छाड़ करने और बैंक खातों में आए रुपये वापस मांगने वाले 15 दलालों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। एसआईटी प्रभारी देवेंद्र पींचा ने बताया कि हरियाणा और यूपी के सात शैक्षिक संस्थानों के खिलाफ गड़बड़ी मिली है। संस्थानों पर कार्रवाई के लिए एसएसपी ने पीएचक्यू को रिपोर्ट भेज दी है।
आठ शैक्षिक संस्थानों की मांगी रिपोर्ट
एसआईटी प्रभारी देवेंद्र पींचा ने शनिवार को टीम के साथ समीक्षा बैठक की। इस दौरान बाहरी राज्यों के शैक्षिक संस्थानों पर हुई कार्रवाई के साथ ही अग्रिम कार्रवाई पर चर्चा की गई। जिले में आठ शैक्षिक संस्थानों के खिलाफ शुरू हुई जांच की भी समीक्षा की गई। उन्होंने बताया कि सभी संस्थानों के खिलाफ अभी तक कोई गड़बड़ी नहीं मिली है। संवाद
सिडकुल घोटाले की रिपोर्ट मुख्यालय भेजी
सिडकुल निर्माण में हुए घोटाले में अब तक हुई कार्रवाई की रिपोर्ट एसआईटी ने मुख्यालय को भेज दी है। एसआईटी सूत्रों ने बताया कि घोटाले की जांच के लिए तकनीकी कमेटी का गठन होना था। कमेटी का गठन होने के बाद प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। करोड़ों रुपये का घोटाला होने पर जांच में अभी लंबा समय लगेगा। अब तक की रिपोर्ट भेज दी गई है।