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उत्तराखंड की सावित्री देवी की स्विट्जरलैंड में भी धमक

Mon, 22 Jan 2018 10:09 AM IST
भूपेश कनौजिया, अमर उजाला, हल्द्वानी
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प्रतीकात्मक चित्र - फोटो : डेमो फोटो
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जैविक खेती में उत्तराखंड की पहचान स्थापित करने वाली कोटाबाग की सावित्री देवी जैविक खेती के बल पर ही स्विट्जरलैंड को धान निर्यात कर रही हैं।

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यह धान भी औने-पौने दाम पर नहीं बल्कि सामान्य से पांच गुना अधिक दाम पर। उनकी छोटी सी शुरुआत का ही नतीजा है कि इस समय कोटाबाग विकास खंड के करीब सात गांव जैविक खेती को अपना रहे हैं और छोटी जोत होने के बाद भी करीब 400 क्विंटल धान सीधे यूरोप भेज रहे हैं।

सावित्री देवी ने वर्ष 2000 में जैविक खेती की शुरुआत की थी। सिर्फ डेढ़ एकड़ में फैले मनकंडपुरा गांव के अपने खेतों में उन्होंने धान, गेहूं से लेकर अन्य कई फसलों को उगाना शुरू किया। इस बीच जैविक खेती के लिए लगातार प्रशिक्षण हासिल करती रहीं और आसपास के लोगों को भी प्रेरित करती रहीं। अमर उजाला से बातचीत में सावित्री देवी ने बताया कि इस समय पाटकोट, पवलगढ़, क्यारी, मनकंठपुर सहित सात गांव जैविक खेती से जुड़ गए हैं।
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हरियाणा की एक कंपनी कोहीनूर से अनुबंध किया गया। अब इस कंपनी के जरिए ही करीब 5500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 400 क्विंटल धान स्विट्जरलैंड भेजा जा रहा है। जैविक खेती की अपनी इस मुहिम में सावित्री देवी ने अन्य महिलाओं को भी शामिल किया है। दुर्गा जैविक उत्पादक उप समूह के जरिए जैविक उत्पाद तैयार कर बेचे जाते हैं। इस उपसमूह से करीब 12 महिलाएं जुड़ी हुई हैं।
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उत्तराखंड में संभावना अधिक
सावित्री देवी के मुताबिक प्रदेश में जैविक खेती के प्रसार की पर्याप्त संभावना है। छोटी जोत होते हुए भी लाभ का प्रतिशत कई गुना बढ़ाया जा सकता है। जैविक खेती के प्रमाणीकरण के लिए तीन साल की सतत खेती की जरूरत होती है और यही वजह है कि कई किसान इससे नहीं जुड़ते। सावित्री देवी की एक खास बात यह भी है कि खेती में स्थानीय स्तर पर समस्या के समाधान पर उनका जोर रहता है। जैविक कीटनाशक और खाद भी वह खुद ही तैयार कर लेती हैं।

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