पूर्णागिरि के आसपास का क्षेत्र अंग्रेज शिकारी जिम कॉर्बेट की कर्मस्थली भी रहा है। तल्लादेश क्षेत्र में वर्ष 1929 में नरभक्षी बाघ का शिकार करते समय जिम कॉर्बेट को पूर्णागिरी मंदिर के पास प्रकाश पुंज के दिव्य दर्शन हुए थे। जिम कॉर्बेट ने इस क्षेत्र में पूर्णागिरि से 12 किमी दूरी पर 1938 में टाक गांव में अपने जीवन के अंतिम नरभक्षी बाघ का शिकार किया था।
इस तरह पहुंचा जा सकता है पूर्णागिरि धाम
वर्तमान में पूर्णागिरि दर्शन के लिए टनकपुर रेल मार्ग से पहुंचा जा सकता है। टनकपुर सड़क मार्ग से बरेली से पीलीभीत खटीमा होकर पहुंचा जा सकता है।
टनकपुर से 16 किमी दूर स्थित भैरव मंदिर तक टैक्सी, प्राइवेट बस एवं रोडवेज बसों की नियमित सेवा के माध्यम से पहुंचा जा सकता है। भैरव मंदिर से करीब चार किमी की दूरी श्रद्धालुओं को पैदल तय करनी होती है।