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उत्तराखंड संस्कृत विवि का आठवां दीक्षांत समारोह, राज्यपाल ने कहा - सामाजिक मूल्य पर खरा उतरें छात्र

Tue, 18 Feb 2020 07:38 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार

सार

  • कर्मकांड तक सीमित नहीं संस्कृत भाषा: राज्यपाल 
  • संस्कृत विवि के आठवें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल बेबी रानी मौर्य बांटी डिग्रियां 
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- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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उत्तराखंड संस्कृत विवि के आठवें दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति एवं राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने छात्र-छात्राओं को पीएचडी की उपाधि और सर्वाधिक अंक प्राप्त करने छात्रों को गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया। इस मौके पर छात्रों को संबोधित करते हुए राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने कहा कि जीवन के उद्देश्य को पूर्ण करने में कई चुनौतियां आएंगी। सभी चुनौतियों का सामना करते हुए आप सबको सामाजिक मूल्य और मानकों पर खरा उतरना होगा।

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मंगलवार को विवि परिसर में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल ने सत्र 2017-18 और सत्र 2018-19 के 32 छात्र-छात्राओं को गोल्ड मेडल और दस छात्र-छात्राओं को पीएचडी की उपाधियों ने नवाजा। दीक्षांत समारोह में कुल 5336 उपाधियां प्रदान की गईं। राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने कहा कि संस्कृत का साहित्य केवल धार्मिक गतिविधियों और कर्मकांड तक सीमित नहीं रहा है। संस्कृत ने ज्ञान की अनेक शाखाओं को आधार प्रदान किया है। इनमें वैदिक गणित से लेकर व्याकरण तक शामिल है। भारत ने दुनिया को शून्य दिया, जिस पर आधुनिक विज्ञान टिका है।

उन्होंने कहा कि संस्कृत को आमजन की भाषा बनाने के लिए लक्ष्य के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष हरिद्वार में महाकुंभ होने वाला है। कुंभ करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु आएंगे। इस आयोजन की सफलता के लिए संस्कृत विवि और उसके छात्र क्या योगदान दे सकते हैं। किस प्रकार से सेवा कार्य कर सकते हैं। इस पर संस्कृत विवि को विचार कर एक कार्य योजना तैयार करनी चाहिए। 
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पूर्व मुख्य सचिव डॉ. इंदु कुमार पांडेय ने कहा कि प्राचीन विद्याओं एवं संस्कृत के संरक्षण के लिए यह विवि बना है। विशिष्ट अतिथि संस्कृत शिक्षा सचिव विनोद रतूड़ी ने कहा कि संस्कृत की भाषा आदिकाल से ही ज्ञान का अद्भुत संगम रही है। 

ये लोग रहे मौजूद 

कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी, डॉ. शैलेश कुमार तिवारी, उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुनील जोशी, दून विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एके कर्नाटक, श्रीदेव सुमन विवि के कुलपति प्रो. पीपी ध्यानी, उत्तराखंड मुक्त विवि के कुलपति प्रो. ओमप्रकाश नेगी, प्रो. दिनेश चमोला, प्रो. मोहन चंद्र बलोनी, डॉ. मनोज किशोर पंत, डॉ. रकेश सिंह, डॉ. दमोदम परगांई, डॉ. रामरत्न खंडेलवाल, डॉ. रत्नलाल, डॉ. धीरज शुक्ला, डॉ. अरविंद्र नारायण मिश्र, डॉ. कामाख्या, छात्र संघ अध्यक्ष प्रभात पंवार आदि मौजूद थे। 

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कुलपति ने उपाधि प्राप्त करने वालों को दिलाई शपथ 

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. देवीप्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि विवि ने इस साल कई उपलब्धियां हासिल की। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से नैक का प्रमाण त्र प्रदान किया जाना और 12बी का निरीक्षण विश्वविद्यालय की विशेष उपलब्धि है। इस अवसर पर उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को शपथ दिलाकर दीक्षित किया। 

इन छात्रों को दिए गए गोल्ड मेडल

विवि के आठवें दीक्षांत समारोह में सत्र 2017-18 के अंकित कुमार, सुभाष पैन्यूली, रविंद्र गैरोला, महेश चंद्र, कविता रानी, राजेंद्र प्रसाद देवराड़ी, नवीन चंद्र उप्रेती, नितिन आर्य, ममता रानी, संदीप मैंदोलिया, पंचराम व्यास, नलिनी चंदेल, रीतु, प्रभा, सरिका, आदेश नौडियाल और सत्र 2018-19 के मनीष कुमार, मुकुल शर्मा, आशुतोष काला, अल्का, अरविंद प्रसाद, राम प्रकाश, दीप्ति आर्या, राम कृष्ण उनियाल, अमर देव, राजन कुमार, शुभम रतूडी, सूरज गौनियाल, शिव अवतार, प्रभा, गौरव जोशी, शशांक पंच भैया को अपने-अपने विषयों सर्वाधिक अंक लाने पर गोल्ड मेडल से नवाजा गया। 

दो को डीलिट की मानद उपाधि 

दीक्षांत में संस्कृत के दो विशिष्ट विद्वानों को विद्यावाचस्पति (डीलिट्) की उपाधि राज्यपाल ने प्रदान की गई। प्रो. जगन्नाथ जोशी और प्रो. जगदीश प्रसाद सेमवाल को यह उपाधि उनके द्वारा संस्कृत के क्षेत्र में अच्छा कार्य करने के लिए प्रदान की गई।

इन छात्रों को दी गई पीएचडी की उपाधि

दीक्षांत समारोह में दीपिका, विशाखा, कुसुम शर्मा, बबीता लसियाल, राकेश सिंह, भूपेंद्र सिंह, जनार्दन प्रसाद कैरवान, शक्ति प्रसाद उनियाल, संदीप रतूड़ी, लखपति देवी को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। 
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