अल्मोड़ा सल्ट विधानसभा उपचुनाव में सात बूथों पर ईवीएम खराब हो गईं। उनकी जगह नई ईवीएम को लाया गया। इस दौरान इन बूथों पर मतदाता वोट देने के इंतजार में खड़े रहे।
सुबह सात बजे के पहले से ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की भीड़ जुटने लगी थी। लोगों की कतारें बन गईं लेकिन कुछ मतदान केंद्रों पर सुबह मतदान शुरू होने से पहले जांच के दौरान ही ईवीएम मशीन खराब हो गई। इसकी सूचना मिलते ही मौके पर मौजूद अधिकारी और कर्मचारी परेशानी में आ गए।
बाद में अधिकारियों को पता चला कि कुल सात बूथों इनलू, हरड़ा तड़ियाल, अजोली, महरौली मल्ली, गड़कोट, लहेड़ा और देघाट गोलना में सुबह ही मशीनों में दिक्कत आ गई। आरओ राहुल साह ने बताया कि मशीनों का पूरी तरह खराब होना तो नहीं कहा जा सकता। कहीं बटन नहीं दब रहा था तो कहीं इसी तरह की छोटी परेशानियां थीं।
बताया कि खराब मशीनों को तुरंत ही बदल दिया गया और मतदान प्रक्रिया शुरू करवा दी गई। उन्होंने बताया कि सल्ट विधानसभा उपचुनाव में मतदान प्रक्रिया शुरू होने के बाद कहीं भी ईवीएम खराब नहीं हुई है।
अजोली को छोड़कर बाकी के छह बूथों पर आधे घंटे में दूसरी ईवीएम की व्यवस्था करके मतदान शुरू करवा दिया गया था, लेकिन अजोली में करीब तीन घंटे तक मतदान प्रक्रिया बाधित रही। दूसरी मशीन लगाने के बाद ही मतदान शुरू हो सका। मतदान शुरू होने तक मतदाता कतार में खड़े होकर इंतजार करते रहे।
भाजपा की ओर से महेश जीना, कांग्रेस की ओर से गंगा पंचोली, सर्वजन स्वराज पार्टी से शिव रावत, उक्रांद समर्थित पान सिंह, पीपीई डेमोक्रेटिव से नंद किशोर, उपपा से जगदीश चंद्र और निर्दलीय सुरेंद्र सिंह अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। यहां पर मुख्यत: टक्कर भाजपा और कांग्रेस में ही है।
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साथ ही सीएम तीरथ सिंह रावत और पूर्व सीएम हरीश रावत की साख भी दांव पर लगी हुई है। अगर भाजपा यह चुनाव जीतती है तो तीरथ के नेतृत्व पर भी मुहर लग जाएगी और अगर ऐसा कुछ होता है जो भाजपा के हक में नहीं होगा तो भाजपा के लिए परेशानी खड़ा करने वाला होगा। वहीं, कांग्रेस की ओर से हरीश रावत गुट की गंगा पंचोली मैदान में हैं। हरीश रावत ने भी चुनाव प्रचार में हिस्सा लिया।
अगर गंगा जीत गईं तो यह पार्टी में हरीश रावत खेमे के लिए अच्छी खबर होगी। इनके अलावा, उक्रांद निर्दलीय प्रत्याशी को समर्थन दे रही है। तो अन्य भी चार उम्मीदवार खड़े हुए हैं। शुक्रवार को प्रत्याशियों ने डोर टू डोर प्रचार किया और फोन से भी मतदाताओं से संपर्क किया। इधर संगठन के तौर पर भाजपा ज्यादा से मजबूती से चुनाव लड़ी है वहीं गंगा पंचोली ने चुनाव को स्थानीय बनाम बाहरी के तौर पर मुद्दा उछाला है।
सल्ट विधानसभा उपचुनाव में दिल्ली का वोटर निर्णायक भूमिका निभाएगा। यदि कोरोना संक्रमण का डर और मतदाता कम संख्या में शनिवार को होने वाले मतदान में पहुंचेंगे तो मतदान का प्रतिशत कम होने के साथ ही वोटर दोनों राष्ट्रीय पार्टियों को सकते में डाल सकते हैं।
सल्ट विधानसभा सल्ट व स्याल्दे की आठ पट्टियों में सिमटा हुआ है, इसमें 96241 मतदाता हैं, जिसमें 49193 पुरुष व 47048 महिला मतदाता हैं।
2019 के लोकसभा चुनाव में दिल्ली वाले न के बराबर मतदान करने पहुंचे थे तो 37 हजार के करीब ही मतदान हुआ था। हालांकि, दोनों राष्ट्रीय पार्टी अपने-अपने स्तर से दिल्ली से सल्ट के विभिन्न गांवों के लिए मतदाताओं को बसों व छोटी गाड़ियों में लाती रहीं हैं लेकिन इस बार कोरोना की गाइडलाइन व मतदाता खुद की सुरक्षा देखते हुए कितना मतदान करने पहुंचता है यह तो मतदान के बाद ही पता चलेगा।