विधानसभा चुनाव में लगातार दूसरी बार हार को पार्टी नेता और कार्यकर्ता पचा नहीं पा रहे हैं। जैसा कि अंदेशा जताया जा रहा था चुनाव परिणामों के दो दिन बाद ही पार्टी के भीतर मची अंतर्कलह अब सतह पर आने लगी है। पार्टी नेताओं ने हार का ठीकरा एक-दूसरे पर फोड़ना शुरू कर दिया है।
इससे पहले कांग्रेस को वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा था। भाजपा सत्ता में आई तो पांच साल में तीन मुख्यमंत्री बदलने के साथ वह ऐसा कोई करिश्मा नहीं कर पाई कि पुन: सत्ता में वापसी के लिए आश्वस्त हो पाती। यही वजह थी कि भाजपा खुद एंटी इनकंबेंसी के रुझानों से घबराई हुई थी।
ऐसे में कांग्रेस के पास सत्ता में वापसी का सुनहरा मौका भी था, लेकिन पार्टी इस मौके को भुना नहीं पाई। चुनाव में पार्टी अपना मत प्रतिशत बढ़ाने के साथ सीटों की संख्या बढ़ाने में तो कामयाब रही, लेकिन सत्ता का दरवाजा उसके लिए फिर भी नहीं खुल पाया। चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष की कमान संभाल रहे हरीश रावत और प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल इस हार की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले चुके हैं, लेकिन बात इतने से बनने वाली नहीं है। नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह समेत तमाम दूसरे नेता अब चुनाव प्रबंधन से लेकर टिकटों के वितरण तक में कुप्रबंधन का आरोप लगा रहे हैं।
फसल कोई बोए, काटने कोई और आ जाए, यह सही नहीं है : प्रीतम
चुनाव परिणाम कांग्रेस के पक्ष में नहीं आने के बाद अब नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने पूर्व सीएम हरीश रावत का नाम लिए बगैर उन पर कई सवाल दागे हैं। उन्होंने कहा कि यह कहां का न्याय है, फसल कोई बोए, काटने कोई और चला आए। दरअसल रामनगर सीट से पिछले पांच सालों से रणजीत रावत तैयारी कर रहे थे, लेकिन ऐन वक्त पर उनका टिकट काट दिया गया और इस सीट से हरीश रावत को दावेदार घोषित कर दिया गया। इसे बाद बवाल हुआ तो हरीश को लालकुआं और रणजीत रावत को सल्ट भेज दिया गया। परिणाम सबके सामने हैं, दोनों चुनाव हार गए।
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मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मुद्दे पर भी बवाल
प्रीतम सिंह ने माना कि मुस्लिम यूनिवर्सिटी कोई मुद्दा नहीं था, लेेकिन भाजपा ने इसे तूल दे दिया। जिसने कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने इस बात पर आपत्ति जताई कि जिस व्यक्ति ने यह मुद्दा उठाया था, उसे उपाध्यक्ष बना दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी इस मामले में अपना पक्ष जनता के सामने ठीक से नहीं रख पाई।
टिकटों के वितरण में चूक हुई
प्रीतम ने कहा कि जो पराजय मिली, उसकी उम्मीद नहीं थी। चुनाव से पहले जिस तरह का उत्साह लोगों का कांग्रेस को लेकर दिख रह था, परिणाम वैसे नहीं आए। उन्होंने माना कि टिकटों के वितरण में चूक हुई। हालांकि, उन्होंने यह बात भी जोड़ी कि हरीश रावत हमारे वरिष्ठ नेता हैं, हार जाने से उनका कद कम नहीं हो जाएगा। चार धाम चार काम के वादों को शायद सही तरीके से लोगों तक नहीं पहुंचा पाए। भाजपा जो वादे करती है, उन्हें कभी पूरा नहीं करती। हर चुनाव में वह नया नारा लेकर आते हैं।
गोदियाल के इस्तीफे की अटकलें
इधर पार्टी के भीतर प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के इस्तीफे की भी अटकलें लगाई जा रही हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, गणेश गोदियाल ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए खुद इसकी पहल की थी, लेकिन उन्हें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मना लिया। इसके बाद गोदियाल का बयान भी सामने आया, उन्होंने कहा कि पार्टी हाईकमान अगर कहेगा तो वह कल इस्तीफा दे देंगे, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि फिलहाल किसी के भी इस्तीफे की कोई बात नहीं है।
हीरा सिंह बिष्ट का भी झलका दर्द
विधानसभा चुनाव में रायपुर सीट से हार के बाद कांग्रेस प्रत्याशी हीरा सिंह बिष्ट का दर्द भी सामने आया है। बीते दिवस अचानक उनके घर पहुंचे पूर्व सीएम हरीश रावत के सामने ही उन्होंने अपने दिल का दर्द बयां कर दिया। उन्होंने कहा कि जब वह वर्ष 2012 में रायपुर से टिकट मांग रहे थे, तब उन्हें डोईवाला भेज दिया गया। अब जब उन्होंने पांच साल डोईवाला में तैयारी की, तब उन्हें रायपुर भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि वह पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं, उनकी बड़ी चाहत नहीं है, लेकिन उनकी भावनाओं का ख्याल नहीं रखा गया।