राज्य परिवहन निगम के बेड़े में 300 से अधिक ऐसी बसें शामिल हैं, जिनकी अवधि पूरी हो चुकी हैं। इस कारण आए दिन इनमें तकनीकी खराबी होती रहती है। इन पुरानी बसों के संचालन होने से आए दिन हादसों का खतरा बना रहता है।
परिवहन निगम के बेड़े में 1364 बसें शामिल हैं, जिनमें से 300 से अधिक बसों की निर्धारित मानकों के मुताबिक अवधि पूरी हो चुकी है। निगम के ही प्रावधानों के अनुसार छह लाख किलोमीटर चलने के बाद पहाड़ों पर बसों का संचालन नहीं किया जा सकता है।
जबकि आठ लाख किलोमीटर दूरी तय करने के बाद मैदानी क्षेत्र में किसी बस को संचालित नहीं किया जा सकता है लेकिन निगम में 300 से अधिक ऐसी बसे हैं, जो इससे अधिक दूरी तय कर चुकी हैं। परिवहन निगम के आंकड़ों पर नजर डालें तो दो दिन में औसतन एक बस को बेड़े से बाहर कर दिया जाता है। इस हिसाब से एक साल में 180 बसें बेड़े से बाहर हो रही हैं लेकिन इन बसों की जगह नई बसें नहीं आने की वजह से निगम में बसों की भारी कमी बनी हुई है।
उधर परिवहन निगम कर्मचारी कर्मचारी संगठन मांग उठा रहे हैं कि निगम में कम से कम 2000 बस हों। निगम ने टाटा और अशोक लेलैंड कंपनी से 300 बसें खरीदी हैं। टाटा कंपनी की ओर से बसों की आपूर्ति कर दी गई, लेकिन गियर लीवर में खराबी होने के चलते तमाम बसों को कंपनी को लौटा दिया गया है।
यूपी में 14500 तो उत्तराखंड में महज 1364 बसें
राज्य गठन के समय उत्तराखंड के हिस्से में 857 बसें आईं थी, जबकि उस समय उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के पास 7000 बसें थी। वर्तमान में यूपी परिवहन निगम में बेड़े में 14500 बसें शामिल हैं जबकि उत्तराखंड परिवहन निगम 857 से बढ़ाकर अभी तक 1364 बसें ही संचालित कर पाया है।
बसों की कमी के चलते कुछ पुरानी बसों का संचालन किया जा रहा है लेकिन पर्वतीय इलाकों में ऐसी एक भी बस नहीं संचालित की जा रही है। प्रबंधन की ओर से 300 नई बसें खरीदी गई हैं। इनकी आपूर्ति सुनिश्चित होने के बाद बसों की संख्या बढ़कर 1600 के आसपास पहुंच जाएगी।
- दीपक जैन, महाप्रबंधक