उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) में एमडी का आदेश कर्मचारियों के लिए मुसीबत बन गया है। राजस्व वसूली में कमी आई या लाइनलॉस कम न हुआ तो अब फील्ड के अधिकारी इसके लिए जिम्मेदार होंगे। इस आदेश के बाद ऊर्जा निगम कर्मचारी विरोध में उतर आए हैं।
शुक्रवार को यूपीसीएल के एमडी डॉ. नीरज खैरवाल ने आदेश जारी किया है। आदेश में लिखा है कि निर्धारित लक्ष्यों के सापेक्ष वसूली नहीं की जा रही है। इस पर 96वीं निदेशक मंडल की बैठक में भी नाराजगी जाहिर की जा चुकी है। लिहाजा, फील्ड कर्मचारियों का वेतन वसूली और लाइनलॉस से लिंक किया जा रहा है, ताकि उनके वेतन से वसूली हो सके।
सभी को कहा गया है कि वह व्यवहारिकता के आधार पर निर्धारित लक्ष्य के तहत वसूली और लाइन लॉस में कमी लाएं। अगर ऐसा न किया गया तो सीधे तौर पर उपखंड अधिकारी, अधिशासी अभियंता और अधीक्षण अभियंता इसके लिए जिम्मेदार होंगे।
ऊर्जा निगम के अधिकारी-कर्मचारी विरोध में उतरे
यूपीसीएल के एमडी का आदेश आने के बाद ऊर्जा निगम से जुड़े कर्मचारी संगठन इसके विरोध में उतर आए हैं। जैसे ही आदेश जारी हुआ तो वार्ता के लिए उत्तराखंड पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन का प्रतिनिधिमंडल एमडी के कार्यालय पहुंचा। हालांकि, उनके न मिल पाने के बाद एसोसिएशन ने यूपीसीएल में ही बैठक बुलाई।
देर रात तक चली बैठक के बाद एसोसिएशन के महासचिव अमित रंजन ने कहा कि कोरोना काल में सभी कर्मचारी लगन से काम कर रहे हैं। जहां एक ओर उपभोक्ताओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जबकि ऊर्जा कर्मचारियों की संख्या लगातार घटती जा रही है। एक-एक अभियंता पर दो से तीन गुना भार है।
फील्ड के कर्मचारियों के पास सिर्फ राजस्व वसूली ही नहीं बल्कि उपभोक्ताओं की शिकायतों के साथ ही 24 घंटे विद्युत व्यवस्था बनाने की भी जिम्मेदारी होती है। उन्होंने कहा कि जब फील्ड में कर्मचारी ही पूरे नहीं हैं तो मापदंड कैसे पूरे हो सकते हैं। उन्होंने इसका विरोध करने का एलान किया है।
वहीं, उत्तराखंड पावर जूनियर इंजीनियर एसोसिएशन के केंद्रीय अध्यक्ष जेसी पंत ने कहा कि कोरोना की विषम परिस्थितियों में वह लगातार पूरी निष्ठा से अपना काम कर रहे हैं। इस पर यूपीसीएल एमडी का यह आदेश बेहद निराश करने वाला है। उन्होंने कहा कि यूपीसीएल के इस आदेश का पुरजोर तरीके से विरोध किया जाएगा।