अब इस संबंध में विधायी और विधानसभा सचिवालय की ओर से अधिसूचना जारी किए जाने की औपचारिकता बाकी है। इस बीच गैरसैंण में सत्र को लेकर मीडिया कर्मियों ने स्पीकर से पूछा तो उनका कहना था कि यह निर्णय प्रदेश सरकार को करना है, सरकार कहेगी तो सत्र आहूत हो जाएगा। गैरसैंण विधानसभा में दिसंबर माह में पहले भी सत्र कराया जा चुका है। स्पीकर के इस बयान पर मीडिया कर्मियों ने मुख्यमंत्री से सवाल पूछा तो उन्होंने साफ किया कि सत्र कहां आहूत करना है, यह सरकार को तय करना है।
यह सरकार को निर्णय लेना है कि सत्र कहां पर होगा। कई ऐसे वरिष्ठ विधायक हैं, जिनकी आयु काफी है। सबकी बात सुननी पड़ती है। कई दिक्कतें गैरसैंण में रहती है, विशेषकर सर्दियों के समय में। पिछली बार का अनुभव अच्छा नहीं रहा। सत्र कब करना है यह सरकार को तय करना है।
- त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री
ऐसा कोई भी विधायक नहीं कह सकता है। सरकार गैरसैंण को लेकर गंभीर नहीं। पहली बार होगा कि स्थापना दिवस पर कोई कार्यक्रम गैरसैंण में नहीं किया गया। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में फैसला लिया गया था, कि हर वर्ष बजट सत्र गैरसैंण में होगा। सरकार ने शीतकालीन सत्र भी गैरसैंण में नहीं किया। पिछले वर्ष की तरह बजट सत्र करेगी, इसका कोई इरादा नहीं है। ऐसा हुआ तो गैरसैंण में विधानसभा का शून्य सत्र हो जाएगा, जो उचित नहीं है। जहां तक रहने की व्यवस्था का सवाल है, करोड़ों रुपये खर्च किए गए। गैरसैंण में सत्र न होने से लोग निराश भी हैं।
- गोविंद सिंह कुंजवाल, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष
विधानसभा सत्र कब और कहां होना है, यह प्रदेश सरकार को तय करना है। जहां तक विधानसभा की तैयारी का सवाल है तो वह पूरी है। गैरसैंण में दिसंबर में सत्र कराया जा चुका है।
- प्रेमचंद अग्रवाल, विधानसभा अध्यक्ष (सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया)