पुलिस अधिकारियों को जानकारी मिली है कि खीम सिंह पुलिस की लगातार दबिश से परेशान हो गया था। जंगल में रहते हुए उसका संपर्क नक्सली संगठनों से कट गया था। इसी कारण उसने भोपाल में रहने वाले मनीष श्रीवास्तव से संपर्क साधा।
मनीष ने ही नक्सलियों की धनबाद में आयोजित अगली बैठक के बारे में जानकारी दी थी। यूपी एटीएस की सर्विलांस टीम के निशाने पर मनीष था। खीम सिंह से बातचीत का इनपुट मिलते ही एटीएस ने मनीष और उसकी पत्नी को हिरासत में लिया तो पूछताछ में खीम सिंह बोरा के राज सामने आ गए। इसी आधार पर खीम सिंह की गिरफ्तारी संभव हो सकी।
उत्तराखंड पुलिस थक चुकी थी
दो साल पहले देवेंद्र चम्याल की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने अल्मोड़ा के सोमेश्वर हत्यूड़ा गांव का निवासी खीम सिंह बोरा की तलाश करने के लिए अल्मोड़ा, चंपावत सहित कई जिलों के जंगलों की खाक छानी लेकिन कामयाबी नहीं मिली।