अक्सर छोटे-छोटे साक्ष्य भी अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए काफी होते हैं। दून पुलिस इसमें अक्सर मात खा जाती है। फॉरेंसिक साइंस में पिछड़ापन इसका अहम कारण है। लेकिन, अब ऐसा नहीं होगा।
उत्तराखंड पुलिस भी दुनिया भर में मशहूर गुजरात की फॉरेंसिक तकनीक अपनाने जा रही है। इससे पुलिस की जांच के तौरतरीके पूरी तरह बदल जाएंगे।
दरअसल हाल ही में डीआईजी जीएस मर्त्तोलिया, अपर सचिव गृह सवीन बंसल और वैज्ञानिक मनोज कुमार ने गुजरात का दौरा कर फॉरेंसिक तकनीक की जानकारी ली। अधिकारियों की रिपोर्ट पर पुलिस मुख्यालय ने इस दिशा में कदम बढ़ने का फैसला किया है।
देहरादून में फॉरेंसिक लैब का काम अंतिम चरण में है, जबकि रुद्रपुर में भी लैब प्रस्तावित है। दोनों लैब को अपग्रेड कराने के लिए गुजरात के फॉरेंसिक एक्सपर्ट यहां पहुंचेंगे।
इस टीम का पूरा खर्च पुलिस मुख्यालय ही उठाएगा। डीजीपी बीएस सिद्धू ने बताया कि इस योजना का ब्लू प्रिंट तैयार कर जल्द ही शासन को भेजा जाएगा।
घटना होने पर तुरंत पहुंचेगी एफएसएल वैन
वर्तमान में किसी भी घटना के बाद फिंगर प्रिंट व अन्य विशेषज्ञों को मौके पर पहुंचने में काफी समय लग जाता है। ऐसे में कुछ अहम साक्ष्य या तो नष्ट हो जाते हैं या कर दिए जाते हैं। पुलिस का इसपर विशेष ध्यान होगा।
गुजरात की तर्ज पर उत्तराखंड में हर जिले में एफएसएल यानि फोरेसिंक साइंस लेबोट्ररी मोबाइल वैन होगी। पहले चरण में ऐसी तीन वैन शुरू करने की योजना है। वैन में फॉरेंसिक एक्सपर्ट के अलावा अत्याधुनिक उपकरण भी मौजूद होंगे।
घटना की सूचना मिलते ही यह वैन मौके पर पहुंच जाएगी। साथ ही प्रिंगरप्रिंट लेने के लिए अलग डिवीजन होगा। उत्तराखंड में अब तक अपराधियों के प्रिंगरप्रिंट का पूरा रेकार्ड अपडेट नहीं है।
ड्रग्स के मामले में अहम
फोरेसिंक सांइस लेबोट्ररी वैन के माध्यम से चरस-स्मैक आदि नशीले पदार्थों की मौके पर ही जांच हो जाएगी। प्राथमिक तौर पर पुष्टि होने के बाद पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी। अब तक नशीले पदार्थों को लेकर बड़ा खेल होता रहा है। मौके पर पकड़े जाने वाली चरस सुनवाई के दौरान कोयला बन जाती थी।
मनोवैज्ञानिक करेंगे पूछताछ
गुजरात में हत्या, डकैती और लूट के मामले में शक के दायरे में आए लोगों से पूछताछ डंडे के जोर पर नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक करते हैं। इसके लिए बाकायदा अलग मनोवैज्ञानिक सेल बनाया गया है। इस सेल में मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ करने वालों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। उत्तराखंड पुलिस भी अब यही तरीका अपनाएगी।
(नोटः इस खबर से संबंधित किसी भी सुझाव या सवाल के लिए मेल आईडी-rakeshk@mrt.amarujala.com और इस नंबर-9675501486 पर संपर्क कर सकते हैं।)