पुलिस महानिरीक्षक ने थानों में संतरी ड्यूटी व्यवस्था लागू न करने पर भी एतराज जताया। उन्हाेंने कहा कि सहसपुर में यौन शोषण के आरोपी के हवालात में खुदकुशी भी इसी लापरवाही का परिणाम है। सिर्फ होमगार्ड के सहारे निगरानी ड्यूटी कराई जा रही है।
विवेचक से मुकदमा संबंधी हर पर्चा लिखापढ़ी में लिया जाए। उन्होंने थाना स्तर पर प्रचलित व्यवस्था के अनुरूप जन-शिकायतों के निराकरण और पंजीकृत प्रथम सूचना रिपोर्ट के विधिक निस्तारण की दिशा में मार्ग दर्शन दिया। एसएसपी अरुण मोहन जोशी और एसपी सिटी श्वेता चौबे भी इस दौरान मौजूद रहे।
48 घंटे में क्लेम को ट्रिब्यूनल को भेजें सूचना
आईजी ने कहा कि किसी भी सड़क दुर्घटना से संबंधित मामले में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर 48 घंटे के अंदर उसकी सूचना क्लेम ट्रिब्यूनल को भेजी जाए। विवेचक को निर्धारित फ ार्म-54 भरकर 30 दिनों में मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल को भेजना होगा। दुर्घटना के पीड़ित, गवाहों और मृत्यु की दशा में मृतक के परिजनों को न्यायालय में उपस्थित कराने की जिम्मेदारी थाना प्रभारी की होगी।
पुलिस महानिरीक्षक रौतेला ने कहा कि एफआईआर में चोरी हुई संपत्ति की पहचान भी दर्ज होनी चाहिए। अधिकतर मामलों में देेखने में आता है कि पुलिस संपत्ति की पहचान लिखवाने से बचती है। वादी की तरफ से यह लिखवाकर पल्ला झाड़ लिया जाता है कि चोरी हुए सामान की सूची बाद में दी जाएगी।
हर एफआईआर पर हो एसओ के हस्ताक्षर
आईजी ने कहा कि हर एफआईआर पर थाना प्रभारी के हस्ताक्षर होने चाहिए। थानों में यह व्यवस्था लागू न होने पर उन्होंने आपत्ति जताई। कहा कि थानाध्यक्ष बाहर हैं तो द्वितीय अधिकारी से हस्ताक्षर करा लिए जाएं। जब भी थाना प्रभारी लौटकर आए तो एफआईआर पर अनिवार्य रूप से हस्ताक्षर करा लेने चाहिए।
कार्यशाला कराने के पीछे मकसद हेड मोहर्रिर को उनके मूल काम का बोध कराने के साथ नए पुलिस उपाधीक्षकों को यह बताना था कि थानाें के निरीक्षण के दौरान दस्तावेजों की जांच किस तरह करनी है। इस कवायद के पीछे सिर्फ मंशा यह है कि सक्रिय अपराधियों का पूरा रिकार्ड होने के साथ न्यायालयों में उनके खिलाफ प्रभावी पैरोकारी की जा सके।
-अजय रौतेला, पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल रेंज