इन पांच कंपनियों को राहत
पीसीबी ने एपीआर एक्शन प्लान जमा करने वाली पांच कंपनियों को एनओसी रद्द करने के फैसले से बाहर रखा है। इनमें ब्रिटानिया इंडस्ट्री लि., परफेटी वैन मेल्ले लि., हिन्दुस्तान यूनिलीवर लि., पतंजलि आयुर्वेद लि. और रेकिट बेनकीसर लि. शामिल हैं।
उठ रहे सवाल
1724 फैक्टरियों की ओर से अब तक ईपीआर प्लान जमा ही नहीं कराया गया। ऐसे में पीसीबी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। माना जा रहा है कि हाईकोर्ट को जवाब देने के चक्कर में बोर्ड ने यह कदम आनन-फानन उठाया है।
पीसीबी के अलावा कंपनियों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। कानून में स्पष्ट है कि प्लास्टिक निस्तारण से जुड़ा ईपीआर प्लान जमा कराना है। कंपनियां जिम्मेदारी से नहीं बच सकती हैं।
- अनूप नौटियाल, अध्यक्ष, एसडीसी फाउंडेशन
पीसीबी ने उद्योगों का पक्ष सुनें बिना ही कार्रवाई की है। वेस्ट मैनेजमेंट एक्ट की नई व्यवस्था को लेकर एमएसएमई के सामने आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों को लेकर सरकार को कोर्ट में पैरवी करनी चाहिए।
-पंकज गुप्ता, अध्यक्ष, आईएयू
एमएसएमई उद्योग का पक्ष हाईकोर्ट के सामने रखने के लिए पांच सदस्यीय कोर कमेटी बनाई गई है। जो वरिष्ठ वकीलों से विचार विमर्श कर रही है। वेस्ट मैनेजमेंट एक्ट में जो प्रावधान हैं, वे छोटे उद्योगों के लिए व्यावहारिक नहीं है। एमएसएमई के पास इतने संसाधन नहीं है कि जटिल प्रावधानों का पालन कर सके। इसके लिए कोर्ट से एमएसएमई उद्योगों को छूट देने का आग्रह किया जाएगा।
- अनिल मरवाह, प्रदेश समन्वयक, फूड इंडस्ट्री एसोसिएशन आफ उत्तराखंड